भारतीय नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक आधुनिक तथा शक्तिशाली बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। नौसेना अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, क्वांटम तकनीक, स्वायत्त प्रणालियों और लेजर आधारित हथियारों जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दे रही है। नौसेना उपप्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने सोमवार को नई दिल्ली में कहा कि भारतीय नौसेना का लक्ष्य एक ऐसा बहु-क्षेत्रीय नेटवर्क बल बनना है, जो हवा, समुद्र और पानी के भीतर के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में भी अपनी क्षमताओं का विस्तार कर सके। उन्होंने यह जानकारी स्वावलंबन 2026 से पहले आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान दी। वाइस एडमिरल अजय कोचर ने बताया कि भारतीय नौसेना के 42 प्लेटफॉर्म फिलहाल ऑर्डर पर हैं। इसके अलावा 78 अन्य प्लेटफॉर्म और 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट यानी एफआईसी की खरीद से जुड़ी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इन सभी की अनुमानित कुल कीमत करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। इन परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति मिल चुकी है और खरीद प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाना और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना है। आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलती तकनीक को देखते हुए नौसेना विशेष रूप से ड्रोन और मानवरहित विमानों से पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए नई प्रणालियों पर विचार कर रही है। वाइस एडमिरल कोचर ने संकेत दिया कि नौसेना निर्देशित-ऊर्जा अस्त्र प्रणाली हासिल करने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। लेजर आधारित ऐसी प्रणालियों का इस्तेमाल दुश्मन के ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई उपकरणों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। अप्रैल में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने लेजर आधारित निर्देशित-ऊर्जा अस्त्र प्रणाली का सफल परीक्षण किया था। इस तकनीक को आधुनिक वायु रक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका उद्देश्य कम लागत वाले ड्रोन जैसे खतरों का प्रभावी तरीके से मुकाबला करना है। हालांकि, नौसेना में ऐसी प्रणालियों को शामिल करने से संबंधित निर्णय और उनकी परिचालन क्षमता अलग-अलग परीक्षणों तथा खरीद प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। वाइस एडमिरल कोचर ने हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से मिले सबक का जिक्र करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में स्वायत्त प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना इन बदलावों से पूरी तरह अवगत है और भविष्य की जरूरतों के अनुसार नई तकनीकों को अपनाने पर काम कर रही है। उन्होंने मानवरहित विमान प्रणालियों से निपटने वाली तकनीक और क्वांटम प्रौद्योगिकी को भी भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। नौसेना का मानना है कि तकनीकी नवाचार को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे समुद्र में इस्तेमाल होने वाली व्यावहारिक क्षमताओं में बदलना जरूरी है। इसी उद्देश्य से नौसेना 26 अक्टूबर को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में स्वावलंबन सेमिनार के पांचवें संस्करण का आयोजन करेगी। वाइस एडमिरल कोचर ने कहा कि इस पहल का सामूहिक लक्ष्य भारत की तकनीकी प्रतिभा और क्षमताओं को नौसेना की परिचालन जरूरतों से जोड़ना तथा स्वदेशी नवाचार को वास्तविक सैन्य उपयोग के योग्य बनाना है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संकटों के बीच भारतीय नौसेना की भूमिका पर भी बात की। उनके मुताबिक, भारत के समुद्री हित देश की सीमाओं से काफी आगे तक फैले हुए हैं, इसलिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नौसेना की अहम जिम्मेदारी है। उन्होंने नौसेना के ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का उल्लेख करते हुए बताया कि इस अभियान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हमलों के बीच कई जहाजों को सुरक्षित भारतीय तटों तक पहुंचाने में मदद की। नौसेना उपप्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि नौसेना का भविष्य केवल मौजूदा संघर्षों से तय नहीं होता, बल्कि दीर्घकालिक तकनीकी विकास और बदलती सुरक्षा जरूरतें भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गौरतलब है कि स्वावलंबन सेमिनार का पहला संस्करण 2022 में आयोजित हुआ था, जिसमें लगभग 800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। पिछले चार वर्षों में इस पहल का विस्तार हुआ और पिछले साल इसमें करीब 3,000 प्रतिभागी शामिल हुए। भारतीय नौसेना की यह पहल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक, आधुनिक हथियार प्रणालियों और नवाचार को बढ़ावा देने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है। आने वाले समय में AI, लेजर तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


