देशभर में विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। दिल्ली से लेकर मुंबई, लखनऊ, अयोध्या, भोपाल, पटना और नागपुर तक जगह-जगह रावण दहन के भव्य आयोजन हुए। मैदानों में उमड़ी भीड़, आकर्षक रामलीलाएं और जय श्रीराम के जयकारों से माहौल भक्तिमय नजर आया। इस खास मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दशहरा समारोहों में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत का कोना-कोना राममय है और भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी सुशासन का सबसे बड़ा मानदंड हैं।
दिल्ली में विजयादशमी के अवसर पर कई स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारका में आयोजित दशहरा समारोह में शामिल हुईं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी दिल्ली के दशहरा महोत्सव में हिस्सा लिया। दोनों नेताओं ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और इस पर्व को सत्य, न्याय तथा धर्म की विजय का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि गांव-गांव और शहर-शहर रामलीलाओं के मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा और आस्था की प्राण ऊर्जा है। यह पर्व अत्याचार पर न्याय और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देता है।
प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसा शासन है, जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, सभी को न्याय मिले और हर व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल सत्ता चलाना नहीं, बल्कि जनकल्याण होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने गरीबों और वंचितों की सेवा को सर्वोपरि रखने तथा नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान भी किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए आत्मविश्वास और सामूहिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो और चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो, लोगों को अपनी क्षमता पर भरोसा रखना चाहिए। भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र सामने होने और लंका दूर होने के बावजूद संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। सामूहिक शक्ति और जनभागीदारी के माध्यम से कठिन लक्ष्य को हासिल किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे सफलता का महत्वपूर्ण मंत्र बताया।
वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पर्व अधर्म और अन्याय पर धर्म और न्याय की विजय का उत्सव है। उन्होंने रामलीलाओं के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से करोड़ों लोग भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को याद करते हैं। राष्ट्रपति ने नागरिकों से भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ परंपराओं को बनाए रखने और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देने की अपील की।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व सत्य, न्याय और धर्म के प्रति विश्वास को मजबूत करता है। उनके संदेशों में समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारे और एकता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
इस बीच, देशभर में रावण दहन के कार्यक्रमों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मैदानों और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचे। रंग-बिरंगी रोशनी, आतिशबाजी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रामलीलाओं ने उत्सव की रौनक बढ़ाई। नवरात्रि के दौरान जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में भी चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई।
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण के वध की स्मृति में मनाया जाने वाला यह त्योहार लोगों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। देशभर में हुए आयोजनों के बीच एक बार फिर यही संदेश प्रमुखता से सामने आया कि समाज में न्याय, सद्भाव और मानवता के मूल्यों को बनाए रखना जरूरी है।


