हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप आज के समय में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। कई लोगों को लंबे समय तक इस बात का पता भी नहीं चलता कि उनका रक्तचाप सामान्य से अधिक बना हुआ है। परेशानी तब बढ़ती है, जब लगातार बढ़ा हुआ बीपी धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी और आंखों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में जिन लोगों को पहले से हाई बीपी की समस्या है, उनके लिए नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना बेहद जरूरी है।
लेकिन यहां एक सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से बीपी की दवा ले रहा है, फिर भी उसका रक्तचाप बढ़ा हुआ क्यों रहता है? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कभी खानपान की गलत आदतें, कभी शारीरिक गतिविधियों की कमी, तो कभी दूसरी दवाओं का असर रक्तचाप को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकता है। इसलिए केवल दवा लेना ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना भी जरूरी है।
हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सबसे बड़ी भूमिका खानपान की होती है। अगर आप खाने में जरूरत से ज्यादा नमक लेते हैं, तो शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। इससे शरीर में पानी रुकने और रक्तचाप बढ़ने की आशंका रहती है। अचार, पापड़, नमकीन, पैकेट वाले स्नैक्स और अधिक नमक वाले तैयार खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा ज्यादा हो सकती है। इसलिए इनका सेवन सीमित रखें और भोजन में अतिरिक्त नमक डालने से बचें। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। इसमें भोजन में मौजूद सभी स्रोतों से मिलने वाला नमक शामिल है।
दूसरी बड़ी गलती है शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना। लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना भी उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ा सकता है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार तेज चाल से चलना, हल्का व्यायाम या अन्य गतिविधियां दिनचर्या में शामिल करना लाभकारी हो सकता है। हालांकि, यदि आपका बीपी बहुत अधिक है या आपको हृदय संबंधी समस्या है, तो व्यायाम की शुरुआत करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
शराब का सेवन भी रक्तचाप को बढ़ा सकता है। नियमित या अधिक मात्रा में शराब पीने से बीपी नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा धूम्रपान और तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं तथा हृदय के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। हाई बीपी से पीड़ित लोगों को धूम्रपान से बचना चाहिए और शराब के सेवन को लेकर डॉक्टर से उचित सलाह लेनी चाहिए।
कई बार दवा लेने के तरीके में होने वाली गलतियां भी रक्तचाप बढ़ने की वजह बनती हैं। कुछ लोग बीपी सामान्य होने पर अपनी दवा बंद कर देते हैं, तो कुछ लोग कभी दवा लेना भूल जाते हैं। ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि दवा के कारण ही रक्तचाप नियंत्रण में रह सकता है। दवा की मात्रा खुद से कम या ज्यादा न करें और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें। अगर दवा लेने के बावजूद बीपी लगातार बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से दोबारा परामर्श करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवा की मात्रा, समय या उपचार में बदलाव कर सकते हैं।
इसके अलावा कुछ दूसरी दवाएं भी रक्तचाप बढ़ा सकती हैं। उदाहरण के लिए, इबुप्रोफेन और डाइक्लोफेनाक जैसी कुछ दर्द निवारक दवाएं कुछ लोगों में बीपी बढ़ा सकती हैं। सर्दी-जुकाम की कुछ दवाओं में मौजूद तत्व भी रक्तचाप पर असर डाल सकते हैं। इसलिए यदि आप हाई बीपी की दवा लेते हैं और कोई दूसरी दवा इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। किसी भी जरूरी दवा को बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न करें।
तनाव और नींद की कमी भी रक्तचाप को प्रभावित कर सकती है। लगातार तनाव में रहने से शरीर में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जो बीपी को नियंत्रित करने में बाधा डालते हैं। पर्याप्त नींद लेना, नियमित दिनचर्या बनाए रखना और तनाव कम करने के लिए ध्यान या धीमी सांस लेने जैसी तकनीकों का अभ्यास करना मददगार हो सकता है। यदि खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकने की समस्या है, तो डॉक्टर से जांच कराना भी जरूरी है, क्योंकि स्लीप एपनिया का संबंध उच्च रक्तचाप से हो सकता है।
हाई बीपी को नियंत्रित रखने के लिए घर पर सही तरीके से रक्तचाप मापना भी जरूरी है। मापने से पहले कुछ मिनट आराम करें, पीठ को सहारा देकर बैठें, पैर जमीन पर रखें और बांह को हृदय के स्तर पर रखें। सही आकार वाले कफ का इस्तेमाल करें और रीडिंग लिखकर रखें। लगातार बढ़ी हुई रीडिंग होने पर डॉक्टर को यह जानकारी दिखाएं, ताकि उपचार के बारे में सही निर्णय लिया जा सके।
अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बना रहे, तो हृदय, किडनी, मस्तिष्क और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए नियमित जांच, संतुलित आहार, कम नमक, शारीरिक गतिविधि और समय पर दवा लेना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बीपी की रीडिंग 180/120 या उससे अधिक आए, तो कम से कम एक मिनट बाद दोबारा मापें। यदि रीडिंग इतनी ही बनी रहती है और सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी, सुन्नपन, नजर में बदलाव या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। ऐसे लक्षण न होने पर भी इतनी अधिक रीडिंग आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

