हैदराबाद में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी की पत्नी की हत्या के मामले में पुलिस ने पांच महीने की जांच के बाद बड़ा खुलासा किया है। इस सनसनीखेज वारदात में घरेलू मेड समेत नेपाल से जुड़े कथित अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि घर में काम करने वाली मेड ने ही परिवार की जानकारी गिरोह तक पहुंचाई और वारदात को अंजाम देने में मदद की। आखिर उस रात घर में क्या हुआ था और पुलिस पांच महीने बाद आरोपियों तक कैसे पहुंची? आइए जानते हैं इस खूनी वारदात की पूरी कहानी।
यह मामला हैदराबाद के जुबली हिल्स इलाके के प्रशासन नगर का, जहां रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की हत्या कर दी गई थी। सात और आठ मई की दरमियानी रात उनके घर में हुई इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। घटना के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो घर के अंदर का दृश्य देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
पुलिस के मुताबिक, तनुजा रंजन का शव घर के अंदर मिला था। उनके हाथ बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था। घर के बेडरूम में सामान बिखरा पड़ा था और अलमारियां टूटी हुई थीं। शुरुआती जांच में सामने आया कि घर से करीब 225 ग्राम सोने के गहने और अन्य कीमती सामान गायब थे। पुलिस ने हत्या और लूट का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
इस मामले की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए आसान नहीं था। जांच कई महीनों तक चली। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, संदिग्धों की गतिविधियों और वारदात से जुड़े संभावित सुरागों की पड़ताल की। आखिरकार, पांच महीने की जांच के बाद पुलिस को कथित अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंचने में सफलता मिली।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों में घर में काम करने वाली घरेलू मेड भी शामिल है। आरोप है कि मेड को घर और परिवार की गतिविधियों की जानकारी थी, जिसका इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने कथित तौर पर गिरोह के सदस्यों तक जरूरी जानकारी पहुंचाई और उन्हें घर में प्रवेश करने में मदद की। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
पुलिस ने चारों आरोपियों को 26 अक्टूबर को हैदराबाद के नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह गिरोह नेपाल से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है और इसके सदस्यों पर अलग-अलग स्थानों पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि लूटे गए सोने के गहने कहां बेचे गए और इस वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
इस घटना ने एक बार फिर घरों में काम करने वाले कर्मचारियों के सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, किसी एक मामले के आधार पर सभी घरेलू कर्मचारियों पर संदेह करना उचित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, घर की सुरक्षा व्यवस्था और संदिग्ध गतिविधियों पर सतर्क नजर रखना ऐसी घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
फिलहाल, इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। पांच महीने बाद हुई गिरफ्तारियों से हत्या और लूट की गुत्थी सुलझने की उम्मीद बढ़ी है। अब देखना होगा कि पूछताछ में आरोपियों से और कौन-से खुलासे होते हैं तथा लूटे गए गहनों की बरामदगी में पुलिस को कितनी सफलता मिलती है।


