गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल करके लोगों को डराने वाले एक युवक का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अपराध शाखा ने 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताकर लोगों को जान से मारने की धमकी देता था। आरोपी लोगों के मोबाइल पर WhatsApp वॉयस मैसेज भेजता और गैंग के नाम का डर दिखाकर उन्हें धमकाता था। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने WhatsApp Business अकाउंट की प्रोफाइल पर लॉरेंस बिश्नोई की तस्वीर लगा रखी थी। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया के जरिए लोगों को डराने और धमकाने के तरीकों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार युवक की पहचान अंशु प्रजापति के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र स्थित अमौनी गांव का रहने वाला बताया गया है। आरोप है कि उसने लोगों के बीच अपना प्रभाव जमाने और उन्हें डराने के लिए कुख्यात गैंगस्टर के नाम का सहारा लिया। इसके लिए उसने WhatsApp Business अकाउंट बनाया और उसकी प्रोफाइल तस्वीर पर लॉरेंस बिश्नोई की फोटो लगा दी। इतना ही नहीं, आरोपी ने अपने अकाउंट के विवरण में भी गैंग का नाम लिख रखा था, ताकि संदेश प्राप्त करने वाले लोग उसे गैंग से जुड़ा हुआ समझें।
जांच के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के मोबाइल नंबर जुटाता था। इसके बाद वह WhatsApp पर वॉयस मैसेज भेजकर खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताता और लोगों को जान से मारने की धमकी देता था। इस तरीके से वह अपनी पहचान छिपाकर लोगों के मन में भय पैदा करने की कोशिश करता था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने कितने लोगों को इस तरह के संदेश भेजे और क्या उसके निशाने पर अन्य लोग भी थे।
इस मामले की शुरुआत 18 अक्टूबर 2026 को हुई, जब गाजियाबाद के विजय नगर निवासी आरव शर्मा के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से WhatsApp के जरिए दो वॉयस मैसेज आए। इन संदेशों में कथित तौर पर खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताने वाले व्यक्ति ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। अचानक मिले इन संदेशों के बाद मामला गंभीर हो गया। धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान और उसके पीछे की मंशा का पता लगाने के लिए पुलिस ने जांच शुरू की।
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान धमकी देने के तरीके और WhatsApp अकाउंट से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। जांच में सामने आए सुरागों के आधार पर अपराध शाखा ने आरोपी अंशु प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने गैंगस्टर की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल करके लोगों को क्यों धमकाया और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले माध्यमों का दुरुपयोग करके लोगों को डराने की कोशिश की जा सकती है। किसी कुख्यात अपराधी की तस्वीर लगाना या उसके गिरोह का नाम इस्तेमाल करना अपने आप में उस गिरोह का सदस्य होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे मामलों में धमकी देने वाले व्यक्ति की वास्तविक पहचान और उसके संपर्कों की जांच करना जरूरी होता है।
फिलहाल, गाजियाबाद पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने किन-किन लोगों को निशाना बनाया और उसके खिलाफ अन्य शिकायतें भी दर्ज हैं या नहीं। जांच के बाद ही इस पूरे मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।


