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माओत्से तुंग मीम विवाद में फंसे किलियन एम्बाप्पे, माफी के बाद भी चीन की 3 कंपनियों ने तोड़े करार

फ्रांस के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे इन दिनों अपने खेल नहीं, बल्कि एक विवादित इंटरनेट मीम को लेकर सुर्खियों में हैं। चीन के पूर्व नेता माओत्से तुंग से जुड़े एक मीम पर टिप्पणी करने के बाद एम्बाप्पे को चीन में भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। विवाद इतना बढ़ा कि चीन की तीन कंपनियों ने उनके साथ अपनी व्यावसायिक साझेदारी समाप्त करने का फैसला कर लिया। मामला बढ़ता देख एम्बाप्पे ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी, लेकिन इसके बावजूद उनके लिए मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके खिलाफ नाराजगी देखने को मिली है और एक मंच ने उनसे जुड़ी प्रचार सामग्री हटाने की घोषणा की है।

एम्बाप्पे ने मंगलवार को जारी अपने बयान में स्वीकार किया कि उनकी टिप्पणी उचित नहीं थी। उन्होंने कहा कि अब उन्हें एहसास हुआ है कि उनकी बात से चीन और दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले चीनी समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। फ्रांसीसी फुटबॉल स्टार ने उन सभी लोगों से माफी मांगी, जिन्हें उनकी टिप्पणी से ठेस पहुंची। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी की भावनाओं को चोट पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था और वह चीनी लोगों तथा उनके इतिहास का गहरा सम्मान करते हैं।

दरअसल, यह पूरा विवाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर सामने आए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ। बताया गया कि यह वीडियो फ्रांस के ऑनलाइन बातचीत कार्यक्रम ‘द ब्रिज’ में एम्बाप्पे की मौजूदगी से पहले हुए एक साक्षात्कार का हिस्सा था। बातचीत के दौरान उनसे उनके पसंदीदा इंटरनेट मीम के बारे में सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने एक ऐसे वीडियो का जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति को चीनी तानाशाह बताया गया था। इसके बाद दिखाए गए मीम में चीन के पूर्व नेता माओत्से तुंग के शरीर पर एम्बाप्पे का चेहरा लगाया गया था। इसी मीम को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

इंटरनेट पर एम्बाप्पे को लेकर मजाकिया मीम बनना कोई नई बात नहीं है। फुटबॉल में उनकी लोकप्रियता और मैदान पर उनके प्रभाव को दिखाने के लिए प्रशंसक कई तरह की हास्यपूर्ण तस्वीरें और वीडियो बनाते रहते हैं। कुछ मीम में उन्हें तानाशाह के रूप में भी दिखाया जाता है। हालांकि, चीन में माओत्से तुंग का नाम बेहद संवेदनशील ऐतिहासिक महत्व रखता है। यही वजह है कि इस मीम से जुड़ी टिप्पणी को लेकर वहां लोगों की नाराजगी सामने आई।

माओत्से तुंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख नेता थे और वर्ष 1949 में चीन जनवादी गणराज्य की स्थापना के बाद देश के सर्वोच्च नेतृत्व में रहे। चीन में आज भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें आधुनिक चीन के निर्माण से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, उनके शासनकाल की कई नीतियों की आलोचना भी होती है। इनमें ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ अभियान प्रमुख है, जिसे बड़े अकाल और करोड़ों लोगों की मौत से जोड़ा जाता है। ऐसे ऐतिहासिक संदर्भ में माओत्से तुंग से जुड़े किसी मजाकिया मीम को लेकर प्रतिक्रिया सामने आना चीन में विवाद का कारण बन गया।

इस मामले का सीधा असर एम्बाप्पे के व्यावसायिक समझौतों पर पड़ा। चीन की पेय पदार्थ निर्माता कंपनी डोंगपेंग, डेयरी उत्पाद कंपनी मेंगनियू और पनीर बनाने वाली कंपनी मिल्कग्राउंड ने मंगलवार को उनके साथ साझेदारी समाप्त करने की घोषणा की। कंपनियों ने अपने बयानों में कहा कि वे ऐसी टिप्पणियों या गतिविधियों का समर्थन नहीं करतीं, जिनसे राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचे। इन फैसलों से एम्बाप्पे की चीन में व्यावसायिक छवि को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चीनी लोगों की भावनाओं को आहत करने वाली बातों और गतिविधियों का समाज के विभिन्न वर्गों की ओर से विरोध किया जाना स्वाभाविक है। इस बयान के बाद मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे चीन में राष्ट्रीय भावनाओं और ऐतिहासिक सम्मान से जोड़कर भी देखा जाने लगा।

इसके अलावा, चीन के लोकप्रिय सोशल मीडिया मंच रेडनोट ने भी एम्बाप्पे से जुड़ी प्रचार सामग्री हटाने की घोषणा की। मंच के अनुसार, एम्बाप्पे के साथ उसकी सामग्री साझेदारी 31 दिसंबर 2024 को ही समाप्त हो गई थी। वहीं, उनके खाते पर नए लोगों को जोड़ने की सुविधा भी रोक दी गई। दूसरी ओर, चीन के सोशल मीडिया मंच वीबो पर एम्बाप्पे के बहिष्कार की मांग करने वाले संदेश चर्चा में रहे। कुछ लोगों ने कंपनियों के फैसले का समर्थन किया, जबकि अन्य ने फुटबॉल खिलाड़ी की आलोचना की।

फिलहाल, माफी मांगने के बावजूद एम्बाप्पे का यह विवाद अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि वैश्विक पहचान रखने वाले खिलाड़ियों की टिप्पणियों का असर उनके व्यावसायिक समझौतों और सार्वजनिक छवि पर भी पड़ सकता है। अब देखना होगा कि एम्बाप्पे की माफी के बाद चीन में उनकी छवि को लेकर नाराजगी कम होती है या यह विवाद आगे भी उनके व्यावसायिक संबंधों को प्रभावित करता रहता है।

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