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अटलांटा में G20 की बड़ी बैठक! रूस-यूक्रेन युद्ध और व्यापारिक तनाव पर दुनिया की बड़ी ताकतों में मतभेद

दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के राजनयिक एक बार फिर आमने-सामने हैं। अमेरिका के अटलांटा शहर में आयोजित जी20 की बैठक में वैश्विक संकटों, युद्धों, व्यापारिक तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो रही है। लेकिन इस बैठक में सबसे बड़ी चुनौती किसी समझौते तक पहुंचना है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका की व्यापार नीतियों तक, कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा रणनीति तैयार कर पाएंगी?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अध्यक्षता में शुक्रवार और शनिवार को आयोजित इस बैठक का उद्देश्य दिसंबर में होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करना है। यह शिखर सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में फ्लोरिडा के मियामी स्थित उनके गोल्फ क्लब में आयोजित होने वाला है। अटलांटा की बैठक को इस आगामी सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में रूस और चीन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। इन परिस्थितियों में जी20 देशों के लिए किसी साझा निष्कर्ष पर पहुंचना आसान नहीं दिखाई दे रहा है।

बैठक के प्रमुख मुद्दों में रूस-यूक्रेन संघर्ष, ईरान से जुड़ा सैन्य तनाव, अमेरिका के आयात शुल्क और दक्षिण चीन सागर में चीन का बढ़ता प्रभाव शामिल हैं। इन विवादों का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापार को लेकर अनिश्चितता ने कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक में समुद्री परिवहन मार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर, काला सागर और दक्षिण चीन सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर चर्चा होनी है। ये मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम हैं। यहां किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष या परिवहन में रुकावट अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है।

पश्चिम एशिया की स्थिति भी बैठक के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्र के कुछ देशों और सहयोगियों को ईरान पर संभावित नए सैन्य हमलों तथा उसके जवाबी कदमों के प्रति सतर्क रहने को कहा है। हालांकि, संभावित कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस घटनाक्रम ने सऊदी अरब समेत क्षेत्र के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

इस बैठक में रूस की भागीदारी को लेकर भी पश्चिमी देशों के बीच असहजता दिखाई दे रही है। रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के शामिल होने की जानकारी दी गई है, जबकि चीन की तरफ से उप-विदेश मंत्री प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कुछ जी20 सदस्य देशों ने रूस को आमंत्रित किए जाने पर चिंता जताई है, क्योंकि यूक्रेन के खिलाफ रूसी सैन्य कार्रवाई जारी है।

यूरोप में अमेरिका के सहयोगी देशों के लिए रूस की मौजूदगी इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों के बीच रणनीतिक मतभेद सामने आते रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस के प्रति रुख और मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर भी बहस जारी है। ऐसे में जी20 बैठक में यूक्रेन युद्ध पर साझा दृष्टिकोण तैयार करना कठिन हो सकता है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने भी अपने प्रतिनिधिमंडल के वीजा को लेकर आई परेशानियों पर नाराजगी जताई थी। मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि वीजा संबंधी कठिनाइयों से ऐसा लगा कि वाशिंगटन में हर कोई रूसी विदेश मंत्री की यात्रा से खुश नहीं था। रूस का कहना है कि वह इस बैठक में वैश्विक आर्थिक संस्थानों में सुधार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की अपनी अवधारणा को आगे बढ़ाएगा।

इस बीच, दक्षिण अफ्रीका ने बैठक में अपनी अनुपस्थिति को लेकर कहा कि यह उसकी स्वेच्छा से लिया गया फैसला नहीं था। इस घटनाक्रम ने भी बैठक को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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