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महाराष्ट्र के चंद्रपुर में बाघों का आतंक! एक ही दिन में तीन हमले, दो किसानों की मौत और चरवाहा गंभीर घायल

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में बाघों के हमलों ने ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। खेतों में काम करने और मवेशियों को चराने जाना अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। शुक्रवार को जिले की तीन अलग-अलग तहसीलों में बाघ के हमले की घटनाएं सामने आईं। इन हमलों में दो किसानों की मौत हो गई, जबकि एक चरवाहा गंभीर रूप से घायल हो गया। लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में भय बढ़ता जा रहा है और लोग खेतों में जाने से भी डरने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक, बाघ के हमले की पहली घटना चिमूर तहसील के गरडापार गांव में हुई। यहां 50 वर्षीय किसान सदाशिव खडसंग शुक्रवार को अपने खेत में काम कर रहे थे। वह अपनी पत्नी और एक अन्य महिला मजदूर के साथ कपास चुन रहे थे। इसी दौरान दोपहर करीब एक बजे अचानक एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बाघ के हमले में किसान की जान चली गई। घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।

दूसरी घटना सिंदेवाही तहसील में सामने आई, जहां एक किसान बाघ के हमले का शिकार हो गया। इस इलाके में बाघों की गतिविधियों ने पहले से ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रखी है। बताया जा रहा है कि पिछले आठ दिनों के भीतर सिंदेवाही क्षेत्र में बाघ के हमलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जंगल से सटे खेतों में काम करना अब बेहद जोखिम भरा हो गया है।

तीसरी घटना पोंभूर्णा तहसील में हुई, जहां मवेशी चराने गए एक चरवाहे पर बाघ ने हमला कर दिया। इस हमले में चरवाहा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। एक ही दिन में तीन अलग-अलग स्थानों पर बाघ के हमलों की खबर से पूरे जिले में चिंता फैल गई है।

चंद्रपुर जिले के कई गांव जंगलों के आसपास बसे हुए हैं। यहां ग्रामीणों की आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में उन्हें रोजाना खेतों और जंगल से सटे इलाकों में जाना पड़ता है। लेकिन बाघों के लगातार हमलों ने उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं, वहीं पशुपालकों के सामने मवेशियों को चराने की समस्या खड़ी हो गई है।

ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करे। साथ ही गांवों के आसपास गश्त बढ़ाई जाए, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है और कब तक ग्रामीणों को इस दहशत से राहत मिल पाती है।

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