दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी की हवा लगातार खराब होती जा रही है और कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया है। हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी सीएक्यूएम ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के दूसरे चरण यानी ग्रैप-2 को लागू कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए हैं। होटल और रेस्तरां में तंदूर समेत किसी भी काम के लिए कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा डीजल जनरेटर के संचालन पर भी सख्ती की जाएगी। सवाल यह है कि आखिर दिल्ली की हवा अचानक इतनी खराब कैसे हो गई और ग्रैप-2 लागू होने के बाद आम लोगों की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ने वाला है?
दरअसल, दिल्ली में सोमवार को इस सीजन में पहली बार वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया। राजधानी का औसत एक्यूआई 324 दर्ज किया गया। इससे पहले इस साल 4 फरवरी को दिल्ली का एक्यूआई 339 दर्ज किया गया था। उसके बाद सोमवार को प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहा। यानी करीब नौ महीने बाद राजधानी की हवा एक बार फिर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई है। इस बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए संबंधित एजेंसियों ने ग्रैप-2 लागू करने का फैसला लिया है, ताकि प्रदूषण के स्तर को और बढ़ने से रोका जा सके।
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई दी। सोमवार शाम चार बजे जहांगीरपुरी में एक्यूआई 436 दर्ज किया गया, जबकि रोहिणी में यह 415 और पंजाबी बाग में 413 तक पहुंच गया। इन तीनों इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस संबंधी समस्याओं से परेशान लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
अब बात करते हैं ग्रैप-2 के तहत लागू किए गए प्रतिबंधों की। इसके अंतर्गत होटल, रेस्तरां और खुले भोजनालयों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसमें तंदूर में कोयला या लकड़ी जलाकर खाना बनाने पर भी प्रतिबंध शामिल है। हालांकि निर्धारित स्वच्छ ईंधन और अनुमत उपकरणों के इस्तेमाल से संबंधित नियम अलग हो सकते हैं। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे ईंधनों से निकलने वाले धुएं को कम करना है, जो हवा में प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देते हैं।
इसके अलावा डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी सख्त नियंत्रण लागू किया गया है। जिन स्थानों पर जनरेटर का उपयोग किया जाता है, वहां निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे, ताकि लोग निजी गाड़ियों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित हों। प्रशासन की कोशिश है कि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होने से प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिले।
सड़कों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर की प्रमुख सड़कों और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में मशीनों के जरिए सफाई का काम बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही पानी का छिड़काव किया जाएगा और धूल को नियंत्रित करने वाले विशेष पदार्थों का भी इस्तेमाल होगा। निर्माण स्थलों और सड़कों के आसपास उड़ने वाली धूल को कम करना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रैप-2 लागू होने के बाद अब दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। निजी वाहनों का अनावश्यक इस्तेमाल कम करना, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना और खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने से बचना जरूरी है। खराब वायु गुणवत्ता के दौरान विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को बाहर की गतिविधियों में सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण महसूस होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति पर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की नजर बनी हुई है। ग्रैप-2 लागू होने के बाद अब देखना होगा कि इन प्रतिबंधों और उपायों से हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में दिल्ली की जहरीली हवा से लोगों को राहत मिल पाएगी या फिर प्रदूषण का स्तर और बढ़ने पर इससे भी सख्त कदम उठाने पड़ेंगे। फिलहाल राजधानी के लोगों के लिए साफ हवा एक बार फिर बड़ी चुनौती बन गई है।


