रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में ड्रोन अब सबसे अहम हथियारों में शामिल हो चुके हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और शहरों को निशाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच रूस की ओर से एक नए एयर डिफेंस सिस्टम की चर्चा ने इस युद्ध को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दावा किया जा रहा है कि रूस ने यूक्रेनी ड्रोन और अन्य हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए Pantsir-SMD सिस्टम को युद्ध के मैदान में उतारने की तैयारी तेज कर दी है।
हाल के दिनों में मॉस्को पर हुए बड़े ड्रोन हमलों ने रूस की एयर डिफेंस व्यवस्था के सामने चुनौती जरूर बढ़ाई है। रिपोर्टों में 16 अगस्त की रात बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों का जिक्र किया गया है। हालांकि, हमलों की वास्तविक संख्या, नुकसान और एयर डिफेंस पर पड़े असर को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
रूस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यूक्रेन लगातार लंबी दूरी के ड्रोन और दूसरे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। युद्ध के शुरुआती दौर की तुलना में अब ड्रोन तकनीक काफी तेजी से विकसित हो चुकी है। छोटे आकार, कम लागत और बड़ी संख्या में इस्तेमाल की क्षमता की वजह से ड्रोन किसी भी आधुनिक सेना के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।
इसी चुनौती के बीच Pantsir परिवार का एयर डिफेंस सिस्टम रूस के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Pantsir सिस्टम को कम और मध्यम ऊंचाई पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलग-अलग संस्करणों में मिसाइलों के साथ ऑटोमैटिक गन भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल हवाई लक्ष्यों के खिलाफ किया जाता है।
Pantsir-SMD को लेकर खास चर्चा इसलिए है क्योंकि इसमें ड्रोन जैसे छोटे और अपेक्षाकृत धीमे लक्ष्यों से निपटने की क्षमता पर जोर दिया गया है। हालांकि यह कहना कि कोई भी ड्रोन या बैलिस्टिक मिसाइल इसकी सीमा पार नहीं कर सकती, सैन्य दृष्टि से अतिशयोक्ति होगी। किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता लक्ष्य, दूरी, ऊंचाई, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और हमले की संख्या जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
रूस के सामने चुनौती सिर्फ ड्रोन को मार गिराने की नहीं है। यूक्रेन की रणनीति में बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ भेजना भी शामिल रहा है। ऐसी स्थिति में किसी एयर डिफेंस सिस्टम की असली परीक्षा तब होती है जब उसे एक साथ कई दिशाओं से आने वाले लक्ष्यों का सामना करना पड़े। यही वजह है कि रूस के नए और अपग्रेडेड एयर डिफेंस सिस्टम पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
लेकिन क्या इससे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म हो जाएगा? फिलहाल ऐसा कहना मुश्किल है। किसी एक एयर डिफेंस सिस्टम के मैदान में आने से युद्ध का अंत नहीं होता। यह ज्यादा से ज्यादा किसी एक पक्ष की रणनीति और सैन्य क्षमता को प्रभावित कर सकता है। युद्ध समाप्त होने के लिए सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी बड़ा फैसला जरूरी होगा।
दरअसल, रूस और यूक्रेन दोनों लगातार अपनी सैन्य तकनीक को अपग्रेड कर रहे हैं। एक पक्ष नए ड्रोन विकसित कर रहा है तो दूसरा उन्हें रोकने के लिए एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और नए इंटरसेप्टर सिस्टम पर काम कर रहा है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले समय में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक इस युद्ध की दिशा तय करने में और बड़ी भूमिका निभा सकती है।
इसलिए Pantsir-SMD को रूस का ‘ब्रह्मास्त्र’ कहना आकर्षक जरूर है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता का फैसला युद्धक्षेत्र में इसके प्रदर्शन से ही होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस को अपनी एयर डिफेंस रणनीति पर और ज्यादा ध्यान देने के लिए मजबूर किया है और रूस का जवाब इस जंग को एक नए तकनीकी मोर्चे पर ले जा सकता है।


