गुजरात के मेहसाणा जिले के विजापुर से नकली नोटों के एक हैरान करने वाले मामले का खुलासा हुआ है। यहां एक बैंक की कैश डिपॉजिट मशीन यानी CDM से 500 रुपये के 26 संदिग्ध नकली नोट बरामद होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो कथित तौर पर एक ऐसा गिरोह सामने आया, जो घर पर ही साधारण कलर प्रिंटर की मदद से नकली नोट तैयार कर उन्हें बाजार में चलाने की कोशिश कर रहा था।
मामला विजापुर के विसनगर रोड स्थित HDFC बैंक की शाखा से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि बैंक की कैश डिपॉजिट मशीन में जमा किए गए 500 रुपये के 26 नोट संदिग्ध पाए गए। इसके बाद बैंक की ओर से मामले की जानकारी पुलिस को दी गई और जांच शुरू हुई। पुलिस ने नोटों की जांच के साथ-साथ उन लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की, जिन्होंने कथित तौर पर इन नोटों को मशीन में जमा किया था।
जांच के दौरान पुलिस को कथित नकली नोटों के नेटवर्क के बारे में अहम सुराग मिले। पुलिस के मुताबिक इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि गिरोह का मुख्य आरोपी इंटरनेट से 500 रुपये के नोट की तस्वीर या डिजाइन खोजता था और उसे लैपटॉप में डाउनलोड करता था। इसके बाद कथित तौर पर कलर प्रिंटर की मदद से नकली नोट तैयार किए जाते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने करीब 1.25 लाख रुपये के नकली नोट तैयार किए थे। इसके बाद इन नोटों को अलग-अलग जगहों पर चलाने की कथित कोशिश की गई। बैंक की कैश डिपॉजिट मशीन में 26 नोट पकड़े जाने के बाद पूरा मामला पुलिस की नजर में आया।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने साधारण तरीके से तैयार किए गए नकली नोट बैंक की मशीन तक कैसे पहुंच गए। हालांकि बैंकिंग सिस्टम में नकली नोटों की पहचान के लिए कई तरह की जांच और सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश करते रहते हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कथित तौर पर कितने नोट बाजार में चलाए और इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने नकली नोटों को किन-किन जगहों पर इस्तेमाल किया।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया तरीका है। किसी बड़े प्रिंटिंग सेटअप या अत्याधुनिक मशीनरी के बजाय साधारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और प्रिंटर के इस्तेमाल की बात सामने आई है। हालांकि नकली नोटों की गुणवत्ता, उनकी सुरक्षा विशेषताओं और बरामद सामग्री के बारे में अंतिम जानकारी पुलिस की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। करीब 1.25 लाख रुपये के कथित नकली नोटों की छपाई और उन्हें बाजार में चलाने की कोशिश ने स्थानीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस नेटवर्क के पीछे और कौन लोग हैं और कितने नकली नोट बाजार तक पहुंच चुके हैं।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि नकली नोटों के खिलाफ बैंकिंग सिस्टम और कानून-व्यवस्था एजेंसियों की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि मामले की पूरी सच्चाई पुलिस जांच पूरी होने और अदालत में सामने आने वाले सबूतों से ही स्पष्ट होगी।


