बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI के भीतर विवाद अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता YR सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। रेड्डी ने कई गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए कहा है कि बार इससे बेहतर नेतृत्व की हकदार है। हालांकि, मनन कुमार मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
रेड्डी की ओर से उठाए गए सवालों में कथित तौर पर करीब 150 करोड़ रुपये के फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप भी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने परिवार के सदस्यों की नियुक्तियों और NALSAR से जुड़े विवाद को भी गंभीर मुद्दा बताया है। इन आरोपों ने देश की शीर्ष बार संस्था के कामकाज को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेड्डी ने BCI और उससे जुड़े ट्रस्ट के खातों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वित्तीय लेनदेन और फंड के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। विशेष ऑडिट के जरिए यह स्पष्ट किया जा सकता है कि संस्था और उसके ट्रस्ट के पैसों का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
इसके साथ ही रेड्डी ने लॉ कॉलेजों से मिलने वाले दान पर भी रोक लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि बार और कानूनी शिक्षा से जुड़ी संस्थाओं के बीच वित्तीय संबंधों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता और स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
NALSAR से जुड़े विवाद को भी रेड्डी ने अपने आरोपों में प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर की गई गैर-कानूनी कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। इस मुद्दे को लेकर भी BCI के भीतर मतभेद सामने आने की बात कही जा रही है।
रेड्डी ने परिवार के सदस्यों की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके आरोपों के मुताबिक संस्था के कामकाज में पारिवारिक नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
दूसरी तरफ BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने रेड्डी की मांग को स्वीकार नहीं किया है और लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। ऐसे में अब मामला सिर्फ व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि BCI के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
BCI देश में वकीलों और कानूनी पेशे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में उसके शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के बीच सार्वजनिक तौर पर मतभेद सामने आना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संस्था के भीतर उठे इन सवालों का असर आने वाले समय में उसके कामकाज पर भी पड़ सकता है।
रेड्डी की मांगों में सबसे अहम विशेष ऑडिट है। अगर ऑडिट कराया जाता है तो संस्था और उसके ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच हो सकती है। इससे फंड के इस्तेमाल और अन्य वित्तीय फैसलों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
फिलहाल BCI में दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच विवाद ने कानूनी जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ YR सदाशिव रेड्डी इस्तीफे की मांग के साथ वित्तीय ऑडिट और दान पर रोक जैसे कदमों की मांग कर रहे हैं, वहीं मनन कुमार मिश्रा ने आरोपों को खारिज कर दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि BCI इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि देश की शीर्ष बार संस्था के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बयान सामने आ सकते हैं।


