Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

SBI Vision 2030: 200 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है बैंक का कारोबार, चेयरमैन सी.एस. शेट्टी ने बताया प्लान

भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI ने आने वाले वर्षों के लिए बड़ा विजन तैयार किया है। बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी के मुताबिक, मौजूदा विकास दर को देखते हुए एसबीआई का कुल कारोबार वर्ष 2030 तक करीब 170 से 180 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं, परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो बैंक 200 लाख करोड़ रुपये के स्तर को भी छू सकता है।

एसबीआई देश का सबसे बड़ा ऋणदाता है और भारतीय अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जून 2026 के अंत तक बैंक का कुल कारोबार बढ़कर करीब 110.01 लाख करोड़ रुपये हो गया था। इसमें बैंक के कुल ऋण और अग्रिम समेत अन्य कारोबार शामिल हैं।

सी. एस. शेट्टी ने स्पष्ट किया है कि 2030 तक 200 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा बैंक का कोई आधिकारिक या तय लक्ष्य नहीं है। यह मौजूदा विकास दर और बैंक की संभावित वृद्धि के आधार पर लगाया गया अनुमान है। उनका कहना है कि अगर बैंक की मौजूदा गति बनी रहती है तो कारोबार इस स्तर तक पहुंचने की क्षमता रखता है।

एसबीआई चेयरमैन के मुताबिक बैंक की ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति से काफी हद तक जुड़ी हुई है। अगर भारतीय अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों में करीब 7 से 8 फीसदी की दर से बढ़ती है तो एसबीआई की बैलेंस शीट में सालाना करीब 11 से 12 फीसदी की वृद्धि की क्षमता हो सकती है। इस तरह बैंक का कारोबार लगभग हर छह साल में दोगुना होने की संभावना बनती है।

एसबीआई ने अपने ‘विजन 2030’ के तहत चार प्रमुख हितधारकों को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई है। इनमें ग्राहक, कर्मचारी, शेयरधारक और सरकार एवं नियामक शामिल हैं। बैंक का उद्देश्य ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाना, कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाना और शेयरधारकों के लिए लगातार मूल्य तैयार करना है।

बैंक की रणनीति सिर्फ कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। एसबीआई कृषि, एमएसएमई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वित्तीय सहायता देने में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है। इन क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाना भारतीय अर्थव्यवस्था की जमीनी स्तर पर वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

बैंक के लिए पर्याप्त पूंजी बनाए रखना भी एक अहम प्राथमिकता है। एसबीआई के अनुसार वह अपने कॉमन इक्विटी टियर-1 यानी CET1 अनुपात को करीब 12 फीसदी और पूंजी पर्याप्तता अनुपात यानी CRAR को करीब 15 फीसदी के आसपास बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है। इससे बैंक को भविष्य में ऋण विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही एसबीआई अपनी परिचालन क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। बैंक लागत को नियंत्रित करने और लागत-से-आय अनुपात में करीब 2 से 3 प्रतिशत अंक तक सुधार लाने पर ध्यान दे रहा है। इसका उद्देश्य कम लागत में बेहतर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना और बैंक की दक्षता बढ़ाना है।

एसबीआई का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल बैंकिंग, ग्रामीण वित्तीय सेवाओं, एमएसएमई और कृषि क्षेत्र में बढ़ती मांग बैंक के कारोबार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों और क्रेडिट मांग जैसे कई कारक बैंक की वास्तविक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल 2030 के लिए 200 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा एसबीआई के लिए एक संभावित उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी निश्चित लक्ष्य के तौर पर। अगर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत रहती है और बैंक अपनी मौजूदा वृद्धि की रफ्तार बनाए रखने में सफल रहता है, तो एसबीआई आने वाले वर्षों में भारतीय बैंकिंग और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles