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SEBI ने NSE के 30 हजार करोड़ रुपये के IPO को दी हरी झंडी, सितंबर में आ सकता है देश का सबसे बड़ा इश्यू

भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। बाजार नियामक सेबी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को मंजूरी दे दी है। करीब 30 हजार करोड़ रुपये के इस आईपीओ के जरिए एनएसई के मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। अगर यह इश्यू इसी आकार के साथ आता है, तो यह देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा और मौजूदा रिकॉर्ड भी टूट सकता है।

सेबी की वेबसाइट पर शुक्रवार को उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एनएसई को आईपीओ प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की मंजूरी मिल गई है। यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS पर आधारित होगा। इसके तहत मौजूदा शेयरधारक करीब 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे, जो एनएसई की लगभग छह फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। चूंकि यह पूरी तरह OFS होगा, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली रकम सीधे एनएसई के खाते में नहीं जाएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी।

बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एनएसई अगले सप्ताह अपने आईपीओ का प्राइस बैंड और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां घोषित कर सकता है। इस इश्यू के 15 सितंबर को खुलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि 24 से 25 सितंबर के बीच शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग हो सकती है। हालांकि, अंतिम तारीख और कीमत की जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

करीब 30 हजार करोड़ रुपये का आईपीओ आने पर एनएसई अक्टूबर 2024 में आए हुंदै मोटर इंडिया के 27,858.75 करोड़ रुपये के आईपीओ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ सकता है। इससे पहले भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC का 20,557.23 करोड़ रुपये का आईपीओ देश के सबसे बड़े इश्यू में शामिल था। वहीं, पेटीएम का 18,300 करोड़ रुपये, टाटा कैपिटल का 15,511.87 करोड़ रुपये और कोल इंडिया का 15,200 करोड़ रुपये का आईपीओ भी बड़े इश्यू में गिना जाता है।

हालांकि, देश के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड ज्यादा समय तक एनएसई के पास रह पाएगा या नहीं, यह भी बड़ा सवाल है। रिलायंस की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के प्रस्तावित आईपीओ का आकार करीब 37,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। अगर जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू इसी आकार में आता है, तो वह एनएसई से भी बड़ा आईपीओ हो सकता है। फिलहाल जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की तारीख घोषित नहीं हुई है।

एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि करीब एक दशक तक यह इश्यू नियामकीय अड़चनों में फंसा रहा। एनएसई ने साल 2016 में पहली बार OFS के जरिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये जुटाने के लिए मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। लेकिन को-लोकेशन मामले और कुछ नियामकीय चिंताओं के चलते आईपीओ की प्रक्रिया लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।

मौजूदा मसौदा दस्तावेजों के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI आईपीओ में 2.48 करोड़ तक शेयर बेच सकता है। वहीं एमएस स्ट्रैटेजिक मॉरीशस लिमिटेड करीब 1.60 करोड़ शेयर बेचने की योजना में है। एसबीआई की एनएसई में 3.23 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 फीसदी हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की भी एनएसई में 4.44 फीसदी हिस्सेदारी है।

खास बात यह है कि एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक एलआईसी अपनी 10.72 फीसदी हिस्सेदारी में से कोई शेयर इस आईपीओ में नहीं बेच रही है। एनएसई के निदेशक मंडल ने इस साल फरवरी में आईपीओ लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले एक्सचेंज को सेबी से आईपीओ प्रक्रिया के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र भी मिल चुका था।

करीब 30 हजार करोड़ रुपये का इश्यू सफल होने की स्थिति में एनएसई का बाजार पूंजीकरण पांच लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है। इससे कंपनी भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में और ऊपर पहुंच सकती है। अब निवेशकों की नजर एनएसई की ओर से घोषित होने वाले प्राइस बैंड, आईपीओ की अंतिम तारीख और लिस्टिंग पर रहेगी।

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