क्या रूस पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अमेरिकी दबाव भारत और रूस के रिश्तों को कमजोर कर पाया? या फिर मॉस्को में हुई एक अहम सैन्य बातचीत ने वॉशिंगटन की चिंताएं बढ़ा दी हैं? भारत के आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ का रूस दौरा इन सवालों के बीच चर्चा में है। लेकिन इस दौरे में आखिर किन मुद्दों पर बात हुई और क्या कोई बड़ी रक्षा डील भी हुई?
भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ 16 से 18 सितंबर तक रूस के आधिकारिक दौरे पर रहे। यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब रूस के साथ ऊर्जा व्यापार को लेकर अमेरिका और भारत के संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय नजरें टिकी हुई हैं। रूस पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने की कोशिशों के बीच भारत और रूस के सैन्य अधिकारियों की यह मुलाकात रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मॉस्को में जनरल धीरज सेठ ने रूसी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बातचीत का मुख्य केंद्र भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना रहा। इसमें सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त क्षमता विकास और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल रहे।
रूसी लैंड फोर्सेस के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई मोर्दविचेव के साथ हुई बातचीत में सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों के बीच ऐसे सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहा, जिससे सेनाओं की क्षमताओं और आपसी तालमेल को मजबूत किया जा सके।
इसके अलावा, जनरल धीरज सेठ ने रूसी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बातचीत की। इस दौरान रक्षा उद्योग और रक्षा खरीद यानी प्रोक्योरमेंट से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे। इसका मतलब यह है कि बातचीत केवल सैनिकों के आदान-प्रदान या नियमित मुलाकातों तक सीमित नहीं थी, बल्कि रक्षा तकनीक, प्रशिक्षण और सैन्य क्षमता के विकास जैसे व्यापक विषय भी इसमें शामिल थे।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोग रहा है। भारतीय सेना के लिए रूस से जुड़े रक्षा उपकरणों, तकनीक और रखरखाव के विषय भी दोनों देशों के सैन्य संबंधों का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बातचीत को इसी व्यापक रक्षा साझेदारी के संदर्भ में देखा जा सकता है।
दूसरी तरफ, अमेरिका रूस से जुड़े ऊर्जा व्यापार पर दबाव बढ़ाने की नीति अपना रहा है। अमेरिकी टैरिफ संबंधी कदमों को लेकर भारत और रूस के संबंधों पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, जनरल धीरज सेठ के इस दौरे को सीधे तौर पर अमेरिकी टैरिफ का जवाब बताने या इसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी का दावा करने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि भारत और रूस ने सैन्य सहयोग, संयुक्त क्षमता विकास, प्रशिक्षण और रक्षा खरीद से जुड़े विषयों पर बातचीत की। लेकिन इस दौरे के दौरान किसी नई बड़ी रक्षा डील पर हस्ताक्षर होने या अमेरिका की ओर से इस मुलाकात पर कोई विशेष प्रतिक्रिया आने की पुष्टि यहां मौजूद जानकारी से नहीं होती।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बातचीत आने वाले समय में किसी नए रक्षा समझौते का रास्ता खोलेगी? भारत अपनी रक्षा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले घटनाक्रम और दोनों देशों की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होंगे।


