केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी एएनटीएफ के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी की ओर से किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर से नशीले पदार्थों की तस्करी और उनके दुरुपयोग से निपटने की रणनीति पर चर्चा हो रही है।
अमित शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्यों से नशा-मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर युवाओं और समाज के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में ड्रग तस्करी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हाल ही में जारी नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 में तय किए गए लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा करना है। सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एएनटीएफ को दिए गए लक्ष्यों पर चर्चा की जा रही है। साथ ही अलग-अलग राज्यों में नशीले पदार्थों की तस्करी और उसके इस्तेमाल को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की जा रही है।
अमित शाह ने नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल छोटे स्तर के तस्करों पर कार्रवाई करने से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा। इसके लिए उन बड़े नेटवर्क और लोगों तक पहुंचना जरूरी है, जो नशीले पदार्थों की तस्करी के पीछे काम कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने तस्करों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि नशीले पदार्थों के कारोबार से कमाए गए धन और उससे जुड़ी संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे ड्रग तस्करी के आर्थिक आधार को कमजोर करने में मदद मिल सकती है।
सम्मेलन में एनसीबी और राज्य स्तर की एजेंसियों के बीच समन्वय को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। अलग-अलग राज्यों में सक्रिय तस्करी नेटवर्क कई बार एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। ऐसे में राज्यों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय जांच और कार्रवाई को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दो दिवसीय सम्मेलन 22 और 23 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एएनटीएफ के प्रमुखों के साथ संबंधित सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन की थीम ‘संयुक्त संकल्प, साझा जिम्मेदारी’ रखी गई है।
बैठक में नशीले पदार्थों की तस्करी के बदलते तरीकों और उससे निपटने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों पर भी चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही राज्यों में चल रही कार्रवाई, जांच व्यवस्था और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के प्रयासों की समीक्षा की जा रही है।
नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के तहत तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों की एजेंसियों को एक साझा रणनीति के तहत काम करने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें तस्करी के नेटवर्क को तोड़ना, नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर रोक लगाना और युवाओं को इसके प्रभाव से बचाना प्रमुख उद्देश्य हैं।
अमित शाह ने एजेंसियों से कार्रवाई को और प्रभावी बनाने तथा आपसी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। सम्मेलन के दौरान सामने आने वाले सुझावों और रणनीतियों के आधार पर आने वाले वर्षों में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।


