शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार से रुपये के लिए राहत की खबर सामने आई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 19 पैसे मजबूत होकर 95.80 के स्तर पर बंद हुई। कारोबार के दौरान रुपये ने 95.92 के स्तर से शुरुआत की थी।
रुपये में यह मजबूती ऐसे समय देखने को मिली, जब वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा में सुधार हुआ और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप की उम्मीद से बाजार में रुपये को लेकर भरोसा बढ़ा। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक की संभावित कार्रवाई ने रुपये पर दबाव को कुछ कम किया।
हालांकि, रुपये की बढ़त पूरी तरह से आसान नहीं रही। स्थानीय आयातकों की ओर से डॉलर की मांग लगातार बनी रही। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अपेक्षाकृत सख्त रुख ने भी भारतीय मुद्रा की तेजी को सीमित किया।
दरअसल, भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें रुपये की दिशा में अहम भूमिका निभाती हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात का खर्च बढ़ सकता है और इससे डॉलर की मांग पर असर पड़ता है।
फिलहाल बाजार की नजर आगे रुपये और डॉलर के बीच होने वाले उतार-चढ़ाव पर बनी हुई है। RBI की संभावित भूमिका, वैश्विक बाजार की जोखिम धारणा, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी फेड का रुख आने वाले कारोबार में रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रह सकते हैं।
यानी शुक्रवार का कारोबार रुपये के लिए मजबूती लेकर आया, लेकिन बाजार में अभी भी कई ऐसे दबाव मौजूद हैं जो भारतीय मुद्रा की आगे की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।


