बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस से आने वाली न्यूक्लियर फ्यूल की खेप अचानक अटक गई। वजह बना पाकिस्तान का एयरस्पेस। यूनिट-2 के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर आने वाली रूसी कार्गो फ्लाइट को पाकिस्तानी एयरस्पेस से गुजरने की अनुमति नहीं मिली, जिसके कारण 24 सितंबर को होने वाली डिलीवरी टल गई। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूपपुर बांग्लादेश का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट है और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस परियोजना पर काफी उम्मीदें लगाए हुए है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस से बांग्लादेश तक न्यूक्लियर फ्यूल पहुंचाने के लिए तय रूट में कई देशों के एयरस्पेस का इस्तेमाल होना था। इसी दौरान पाकिस्तानी एयरस्पेस की मंजूरी नहीं मिलने के कारण विमान अपनी निर्धारित यात्रा पूरी नहीं कर सका। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली, जिसके कारण फ्यूल समय पर बांग्लादेश नहीं पहुंच सका।
लेकिन अब इस पूरे मामले में अगला अपडेट सामने आ गया है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम ने बताया है कि रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-2 के लिए न्यूक्लियर फ्यूल की डिलीवरी अक्टूबर 2026 से शुरू की जाएगी और यह सप्लाई दिसंबर तक जारी रहेगी। यानी पाकिस्तान के एयरस्पेस से जुड़ी बाधा के बाद डिलीवरी को पूरी तरह रद्द नहीं किया गया है, बल्कि नई व्यवस्था के तहत इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, रोसाटॉम ने वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए फ्यूल पहुंचाने का भरोसा दिया है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में अगली खेप आने की संभावना बताई गई है। वहीं रोसाटॉम के कार्यक्रम के अनुसार, यूनिट-2 के लिए पूरी फ्यूल सप्लाई दिसंबर 2026 के अंत तक पूरी करने का लक्ष्य है। फ्यूल को कई अलग-अलग कार्गो उड़ानों के जरिए भेजा जाएगा।
अब सवाल उठता है कि आखिर पाकिस्तान ने एयरस्पेस की अनुमति क्यों नहीं दी? शुरुआती जानकारी में इसका स्पष्ट कारण सामने नहीं आया था। बाद में पाकिस्तान की ओर से तकनीकी और प्रक्रियागत वजहों का उल्लेख किया गया। इसलिए इस घटनाक्रम को सीधे किसी राजनीतिक फैसले या कूटनीतिक टकराव का परिणाम मानना अभी उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि एयरस्पेस क्लियरेंस की समस्या ने तय शिपमेंट को प्रभावित किया और इसके बाद रूस को डिलीवरी का नया रास्ता और कार्यक्रम तैयार करना पड़ा।
रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। इसमें दो VVER-1200 रिएक्टर हैं और दोनों की क्षमता लगभग 1,200 मेगावाट है। यानी दोनों यूनिट पूरी तरह संचालन में आने पर प्लांट की कुल क्षमता 2,400 मेगावाट होगी। रूस की रोसाटॉम इस परियोजना की प्रमुख तकनीकी साझेदार है। ऐसे में न्यूक्लियर फ्यूल की समय पर आपूर्ति प्लांट की कमीशनिंग और आगे के संचालन की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
यहां एक और महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। एयरस्पेस की समस्या के कारण फ्यूल की एक खेप में देरी हुई है, लेकिन रोसाटॉम ने फिलहाल परियोजना के फ्यूल डिलीवरी कार्यक्रम को अक्टूबर से दिसंबर के बीच पूरा करने की बात कही है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना से रूपपुर प्लांट के पूरे संचालन कार्यक्रम पर बड़ा असर पड़ेगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी यही संकेत देती है कि डिलीवरी को नए रूट और कई उड़ानों के जरिए आगे बढ़ाने की तैयारी है।
इस पूरे घटनाक्रम में रूस, बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों के साथ-साथ दक्षिण एशिया की एयरस्पेस और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है। एक तरफ बांग्लादेश अपने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए रूपपुर परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है, तो दूसरी तरफ न्यूक्लियर फ्यूल जैसी संवेदनशील सामग्री की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही में कई देशों की अनुमति और सुरक्षा प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ऐसे में एक एयरस्पेस क्लियरेंस भी पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा अपडेट यही है कि पाकिस्तान के एयरस्पेस से जुड़ी रुकावट के बाद रूस ने डिलीवरी का नया कार्यक्रम तैयार कर लिया है। अक्टूबर से न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई दोबारा शुरू होने वाली है और दिसंबर के अंत तक यूनिट-2 के लिए पूरी आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य है। अब नजर इस बात पर होगी कि वैकल्पिक रूट से पहली खेप बांग्लादेश कब पहुंचती है और क्या इसके बाद रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट की आगे की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहती है।


