मुंबई के पवई इलाके के पॉश हीरानंदानी गार्डन्स से चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। 17वीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट से करीब 26 लाख रुपये की नकदी, सोने और हीरे के गहने तथा 20 सोने के सिक्के गायब हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि फ्लैट में न तो ताला टूटने के निशान मिले और न ही जबरन दरवाजा खोलकर अंदर घुसने के कोई स्पष्ट सबूत मिले। इसके बावजूद लाखों रुपये का सामान गायब हो गया। मामले की सूचना मिलने के बाद पवई पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, चोरी हुए सामान में करीब 7 लाख रुपये की नकदी शामिल है। इसके अलावा 20 सोने के सिक्के भी गायब हैं। बताया गया है कि प्रत्येक सिक्के का वजन करीब 10 ग्राम था। यानी कुल मिलाकर इन सिक्कों में करीब 200 ग्राम सोना था। इसके साथ ही शादी के कड़े, सोने और हीरे की बालियां, ब्रेसलेट, चेन और मंगलसूत्र की दो जोड़ियां भी चोरी हुई हैं। चोरी हुए सभी सामान की कुल कीमत करीब 25.9 लाख रुपये आंकी गई है।
इस मामले की सबसे दिलचस्प और रहस्यमय बात फ्लैट में जबरन प्रवेश के निशान का न मिलना है। आमतौर पर चोरी के मामलों में दरवाजा तोड़ने, ताला क्षतिग्रस्त करने या खिड़की के रास्ते प्रवेश करने जैसे सबूत मिलते हैं। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ सामने नहीं आया। ऐसे में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर चोर फ्लैट के अंदर कैसे पहुंचा और बिना किसी बड़े निशान के लाखों रुपये का सामान लेकर बाहर कैसे निकल गया।
शिकायतकर्ता कांसर परिवार के अनुसार, चोरी हुए 20 सोने के सिक्के उन्होंने कई वर्षों में जमा किए थे। परिवार की महिला सदस्य ने वर्ष 2008 से 2014 के बीच कंपनी से मिले बोनस और अपनी बचत के पैसों से इन सिक्कों को खरीदा था। परिवार के लिए ये सिक्के केवल सोने की कीमत की वजह से महत्वपूर्ण नहीं थे, बल्कि इन्हें लंबे समय से बचत के तौर पर सुरक्षित रखा गया था।
परिवार ने पुलिस को यह भी बताया कि 13 सितंबर को कच्छ में उनकी जमीन की बिक्री हुई थी। जमीन बिकने के बाद परिवार को अपनी दादी से कुछ नकदी भी मिली थी। यह रकम भी फ्लैट में रखी गई थी और बाद में चोरी हुई करीब 7 लाख रुपये की नकदी में इसका हिस्सा शामिल था। परिवार को उम्मीद थी कि उनका पैसा और कीमती सामान घर में सुरक्षित रहेगा, लेकिन चोरी के बाद पूरा मामला रहस्य बन गया।
अब पुलिस की जांच कई संभावित पहलुओं पर केंद्रित है। सबसे पहले यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फ्लैट में आने-जाने की जानकारी किन लोगों को थी। पुलिस यह भी जांच सकती है कि घर में काम करने वाले कर्मचारी, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग या परिवार के परिचितों में से किसी को फ्लैट और वहां रखे कीमती सामान के बारे में जानकारी थी या नहीं। इसके अलावा इमारत में लगे सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।
पुलिस के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चोरी कब हुई। परिवार को जब सामान गायब होने का पता चला, उससे पहले फ्लैट में कौन-कौन आया था और कितने समय तक मौजूद रहा, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। चोरी की सही समय सीमा पता चलने पर संदिग्ध गतिविधियों और आने-जाने वाले लोगों की पहचान करना पुलिस के लिए आसान हो सकता है।
इतनी ऊंची मंजिल पर स्थित फ्लैट में चोरी होने के कारण पुलिस के लिए यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है। बिना जबरन प्रवेश के लाखों रुपये का सामान गायब होना इस बात की ओर इशारा करता है कि चोरी करने वाले व्यक्ति को फ्लैट तक पहुंचने के तरीके की जानकारी हो सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति पर संदेह करना या उसे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
फिलहाल पवई पुलिस मामले की जांच कर रही है और चोरी हुए नकदी, सोने के सिक्कों तथा गहनों की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, सुरक्षा कैमरों और फ्लैट में आने-जाने वाले लोगों की जानकारी के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। लेकिन इस पूरी घटना में सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है—जब न ताला टूटा, न जबरन घुसने के निशान मिले, तो आखिर 20 गोल्ड कॉइन और करीब 26 लाख रुपये का सामान फ्लैट से गायब कैसे हो गया? इस सवाल का जवाब पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


