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बिना इंटरनेट कैसे चलते हैं मैसेजिंग ऐप? ब्लूटूथ से बनता है नेटवर्क, जानिए पूरी तकनीक

इंटरनेट बंद होने पर भी क्या मोबाइल से संदेश भेजना संभव है? आमतौर पर लोग मानते हैं कि व्हाट्सऐप या दूसरे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट जरूरी है, लेकिन कुछ ऐप ऐसे भी हैं जो ब्लूटूथ की मदद से आसपास मौजूद मोबाइल फोन के बीच संदेश पहुंचा सकते हैं। ऐसे ऐप उस समय चर्चा में आ जाते हैं, जब किसी इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग ऐप को लेकर भी चर्चा सामने आई है। इसी बीच जाने-माने यूट्यूबर ध्रुव राठी की ओर से ऐसे ऐप डाउनलोड नहीं करने की अपील किए जाने की बात कही गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इंटरनेट के बिना ये ऐप काम कैसे करते हैं और इनका नेटवर्क बनता कैसे है?

दरअसल, ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग ऐप इंटरनेट के बजाय आसपास मौजूद अनुकूल उपकरणों के बीच सीधे संपर्क स्थापित करने की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इन ऐप में ब्लूटूथ लो एनर्जी यानी बीएलई जैसी तकनीक की मदद से आसपास के उपकरणों की पहचान की जा सकती है। इसके बाद ऐप उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं के अनुसार एक उपकरण से दूसरे उपकरण तक संदेश पहुंचाने का रास्ता तैयार कर सकता है। इस प्रक्रिया में मोबाइल फोन को हर संदेश के लिए मोबाइल डेटा या वाई-फाई इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती।

इस तकनीक को समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए कि किसी व्यक्ति के मोबाइल में ऐसा मैसेजिंग ऐप मौजूद है और वह अपने दोस्त को संदेश भेजना चाहता है। दोनों फोन ब्लूटूथ की सीमा के भीतर हैं, तो ऐप उनके बीच स्थानीय संपर्क स्थापित कर सकता है। यदि दूसरा फोन भी उस ऐप और आवश्यक सुविधाओं का समर्थन करता है, तो संदेश सीधे एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक पहुंच सकता है। इस तरह इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी नजदीक मौजूद व्यक्ति से संवाद करना संभव हो सकता है।

कुछ ऐप इससे आगे बढ़कर जाल नेटवर्क यानी मेश नेटवर्क जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं। इसमें एक मोबाइल फोन दूसरे मोबाइल तक संदेश पहुंचाने के लिए बीच की कड़ी बन सकता है। उदाहरण के लिए, यदि पहला फोन दूसरे फोन से संपर्क कर सकता है और दूसरा फोन तीसरे फोन की सीमा में है, तो ऐप की तकनीक के अनुसार संदेश कई उपकरणों के जरिए आगे पहुंच सकता है। इस तरह नेटवर्क में शामिल मोबाइल फोन एक-दूसरे तक संदेश पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा हर ब्लूटूथ आधारित ऐप में उपलब्ध नहीं होती और इसका काम करने का तरीका ऐप के डिजाइन पर निर्भर करता है।

बिटचैट इसी तरह के विकेंद्रीकृत संदेश भेजने वाले ऐप का एक उदाहरण है। इसे ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी ने विकसित किया है। इस तरह के ऐप का उद्देश्य इंटरनेट पर निर्भर हुए बिना स्थानीय उपकरणों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान संभव बनाना है। हालांकि, किसी ऐप की वास्तविक क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें कौन-सी तकनीक इस्तेमाल की गई है, कितने उपकरण आसपास मौजूद हैं और वे एक-दूसरे से संपर्क स्थापित कर पा रहे हैं या नहीं।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग की भी सीमाएं होती हैं। ब्लूटूथ का संपर्क क्षेत्र सीमित होता है। यदि आसपास पर्याप्त उपकरण मौजूद नहीं हैं, तो संदेश बहुत दूर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। मेश नेटवर्क वाले ऐप में भी संदेश तभी आगे बढ़ सकता है, जब बीच में ऐसे उपकरण मौजूद हों जो उस नेटवर्क का हिस्सा बन सकें। इसके अलावा, मोबाइल की बैटरी, ब्लूटूथ की स्थिति, ऐप की अनुमतियां और फोन की तकनीकी सीमाएं भी इसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।

सुरक्षा और निजता के मामले में भी सावधानी जरूरी है। किसी अनजान ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके निर्माता, अनुमतियों और गोपनीयता नीति की जांच करनी चाहिए। यह देखना भी जरूरी है कि ऐप संदेशों को किस तरह सुरक्षित रखता है और क्या उसमें संदेशों को कूटबद्ध करने की सुविधा मौजूद है। केवल इंटरनेट के बिना काम करने का दावा किसी ऐप को अपने आप सुरक्षित नहीं बना देता।

कुल मिलाकर, बिना इंटरनेट चलने वाले मैसेजिंग ऐप कोई जादू नहीं करते, बल्कि ब्लूटूथ और कुछ मामलों में मेश नेटवर्क जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। ये आसपास मौजूद अनुकूल मोबाइल फोन को आपस में जोड़कर संदेश पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इनकी पहुंच, गति और सुरक्षा ऐप की तकनीक तथा आसपास उपलब्ध उपकरणों पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसे ऐप इस्तेमाल करने से पहले उनकी खूबियों के साथ उनकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है।

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