क्या जियानी इन्फेंटिनो एक बार फिर फीफा अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने जा रहे हैं, या विश्व फुटबॉल में उठ रहे विवाद उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं? मार्च में होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले इन्फेंटिनो ने अपना समर्थन मजबूत करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में वह जापान का दौरा करने जा रहे हैं, जहां टोक्यो में एशियाई फुटबॉल परिसंघ के अधिकारियों के साथ उनकी अहम बैठक होगी। इस बैठक पर इसलिए भी नजरें टिकी हैं, क्योंकि एशियाई देशों का समर्थन चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
जियानी इन्फेंटिनो फीफा के मौजूदा अध्यक्ष हैं और एक बार फिर इस पद पर बने रहने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव से पहले उनका जापान दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था के कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले सप्ताह स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में इन्फेंटिनो ने फीफा परिषद के 37 सदस्यों के सामने अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी थी। यह विवाद विश्व कप से जुड़े 4.2 अरब डॉलर के एक प्रस्ताव को लेकर था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।
इस प्रस्ताव के तहत विश्व कप से जुड़े व्यावसायिक अधिकारों और कारोबार के संचालन के लिए एक अलग कंपनी बनाने की योजना पर विचार किया गया था। हालांकि, इस योजना को लेकर विवाद खड़ा हुआ और अंततः इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इस घटनाक्रम के बाद फीफा के निर्णय लेने के तरीके और संस्था के कामकाज में पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई। इन्फेंटिनो ने इन चिंताओं के बीच निर्णय प्रक्रिया की समीक्षा कराने की पेशकश भी की है।
अब सवाल यह है कि क्या जापान दौरा इन्फेंटिनो के चुनावी अभियान को मजबूती दे पाएगा? टोक्यो में होने वाली बैठक में एशियाई फुटबॉल परिसंघ के अधिकारियों के साथ बातचीत की योजना है। एशिया के सदस्य देशों का समर्थन हासिल करना उनके लिए अहम माना जा रहा है। बताया जाता है कि एशियाई फुटबॉल परिसंघ के अध्यक्ष शेख सलमान बिन इब्राहिम अल खलीफा ने शुरुआत में विवादित प्रस्ताव का विरोध किया था। हालांकि, हालिया घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं के संबंधों में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा हो रही है।
फीफा में कुल 211 सदस्य देश हैं। उपलब्ध समर्थन संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 87 देशों ने सार्वजनिक बयानों या अपने क्षेत्रीय फुटबॉल संगठनों के माध्यम से इन्फेंटिनो के समर्थन के संकेत दिए हैं। चुनाव में जीत के लिए उन्हें साधारण बहुमत हासिल करना होगा। ऐसे में एशियाई देशों का रुख चुनावी मुकाबले में अहम साबित हो सकता है। हालांकि, समर्थन के संकेतों को अंतिम मतदान की गारंटी नहीं माना जा सकता।
एशिया में भी इन्फेंटिनो को लेकर सभी देशों की राय एक जैसी नहीं है। वर्ष 2022 में फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी करने वाले कतर ने उनका समर्थन किया है, जबकि जॉर्डन ने विरोध का रुख अपनाया है। इससे स्पष्ट है कि क्षेत्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने के लिए इन्फेंटिनो को अलग-अलग देशों के रुख को ध्यान में रखना होगा।
चुनाव प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवारों को 18 नवंबर तक अपना नाम देना होगा। नियमों के मुताबिक, उम्मीदवार को पिछले पांच वर्षों में कम से कम दो वर्ष फुटबॉल से सक्रिय रूप से जुड़ा होना चाहिए। इसके अलावा, कम से कम पांच सदस्य देशों का समर्थन भी जरूरी है। फीफा परिषद की अगली बैठक 16 दिसंबर को कतर की राजधानी दोहा में प्रस्तावित है।
फीफा की आर्थिक व्यवस्था और सदस्य देशों को फुटबॉल विकास के लिए दी जाने वाली राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इन पैसों के खर्च की निगरानी और पारदर्शिता को मजबूत करने की जरूरत है। ऐसे में इन्फेंटिनो के सामने चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि संस्था के कामकाज को लेकर उठ रही चिंताओं का जवाब देने की भी है।
अब सभी की नजरें जापान दौरे और आगामी चुनाव पर टिकी हैं। देखना होगा कि इन्फेंटिनो एशियाई देशों का कितना समर्थन जुटा पाते हैं और विवादों के बीच अपनी स्थिति कितनी मजबूत कर पाते हैं।


