देश की प्रमुख सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों में शामिल भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी बीपीसीएल के वित्तीय नतीजे सामने आ गए हैं। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी के शुद्ध लाभ में गिरावट दर्ज की गई है। जुलाई से सितंबर के बीच कंपनी का एकल आधार पर शुद्ध लाभ 22.5 प्रतिशत घटकर 4,993 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी ने 6,443 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। हालांकि, इस गिरावट के बीच कंपनी की परिचालन आय में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कंपनी की कमाई बढ़ने के बावजूद मुनाफा क्यों घट गया?
बीपीसीएल की ओर से जारी वित्तीय जानकारी के अनुसार, दूसरी तिमाही में कंपनी की परिचालन आय बढ़कर 1.58 लाख करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 1.22 लाख करोड़ रुपये था। यानी कंपनी की परिचालन आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन आय बढ़ने के बावजूद शुद्ध लाभ में गिरावट ने कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को चर्चा में ला दिया है।
कंपनी के मुनाफे पर दबाव पड़ने की एक प्रमुख वजह ईंधन की खुदरा कीमतों में बदलाव न होना और अन्य खर्चों से जुड़े नुकसान बताए गए हैं। पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों की बिक्री से होने वाली कमाई पर लागत का सीधा असर पड़ता है। जब कच्चे तेल की लागत और दूसरे खर्चों में बदलाव होता है, लेकिन खुदरा कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव नहीं होता, तो तेल कंपनियों के विपणन कारोबार पर दबाव पड़ सकता है।
बीपीसीएल की कर पूर्व आय यानी ईबीआईटीडीए में भी गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में यह करीब 14 प्रतिशत घटकर 9,437 करोड़ रुपये रह गई। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी का ईबीआईटीडीए 10,968 करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा बताता है कि परिचालन आय में वृद्धि के बावजूद कंपनी के परिचालन लाभ पर दबाव बना रहा।
हालांकि, रिफाइनिंग के मोर्चे पर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। जुलाई से सितंबर की तिमाही में बीपीसीएल ने कच्चे तेल के प्रत्येक बैरल को पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने से 32.53 डॉलर प्रति बैरल का सकल रिफाइनिंग मार्जिन अर्जित किया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह मार्जिन 10.78 डॉलर प्रति बैरल था। यानी रिफाइनिंग मार्जिन में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
इसके बावजूद रिफाइनिंग से होने वाले बेहतर प्रदर्शन का पूरा फायदा कंपनी के कुल मुनाफे में दिखाई नहीं दिया। कंपनी ने बताया कि विपणन और भंडार से जुड़े नुकसान के रूप में 330 करोड़ रुपये दर्ज किए गए। इसके अलावा विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण 397 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इन कारकों ने कंपनी के वित्तीय नतीजों पर असर डाला।
अगर कंपनी के एकीकृत वित्तीय नतीजों की बात करें, तो इस आधार पर भी शुद्ध लाभ में गिरावट देखने को मिली। बीपीसीएल का एकीकृत शुद्ध लाभ 21.5 प्रतिशत घटकर 4,863 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 6,191 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी का एकीकृत राजस्व 29.8 प्रतिशत बढ़कर 1.58 लाख करोड़ रुपये हो गया। एकीकृत ईबीआईटीडीए भी 13.4 प्रतिशत घटकर 9,647 करोड़ रुपये रह गया।
कंपनी की रिफाइनरियों में कच्चे तेल के प्रसंस्करण का स्तर भी महत्वपूर्ण रहा। जुलाई से सितंबर की तिमाही में बीपीसीएल की रिफाइनरियों ने कुल 1.04 करोड़ टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया। यह उनकी स्थापित क्षमता का लगभग 118 प्रतिशत था। इसके साथ ही कंपनी ने घरेलू बाजार में 1.34 करोड़ टन ईंधन की बिक्री की।
बीपीसीएल भविष्य में अपनी रिफाइनिंग क्षमता और पेट्रोरसायन कारोबार को विस्तार देने की दिशा में भी काम कर रही है। कंपनी ने आंध्र प्रदेश के रामायपत्तनम में एक करोड़ टन सालाना क्षमता वाली नई रिफाइनरी और पेट्रोरसायन परिसर परियोजना की योजनाओं को आगे बढ़ाया है। इस परियोजना से भविष्य में कंपनी की उत्पादन क्षमता और कारोबार के विस्तार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, बीपीसीएल की दूसरी तिमाही में परिचालन आय और रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार देखने को मिला, लेकिन शुद्ध लाभ और ईबीआईटीडीए में गिरावट दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर कंपनी के आगामी वित्तीय प्रदर्शन, ईंधन विपणन से होने वाले मुनाफे और विस्तार योजनाओं पर रहेगी।


