उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ में आयोजित जीसीसी इनोवेशन समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के कार्यकाल को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब दस साल पहले उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर ऐसी स्थिति थी कि उद्योग जगत के बड़े नेता यहां आने तक को तैयार नहीं थे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सपा सरकार के कार्यकाल और मौजूदा सरकार की निवेश नीतियों को लेकर बहस तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर आज से दस साल पहले किसी को बताया जाता कि लखनऊ में जीसीसी इनोवेशन समिट आयोजित होने जा रहा है, तो शायद यहां आने के लिए कोई तैयार नहीं होता। उन्होंने अपने संबोधन में 2015-16 के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए इन्वेस्टर समिट आयोजित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उद्योग जगत के नेताओं ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था।
योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि उस समय उत्तर प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल नहीं था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश को लेकर ऐसी परिस्थितियां थीं कि निवेश उत्तर प्रदेश में होना था, लेकिन समिट का आयोजन दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे उस समय की सरकार की स्थिति और व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकार की कानून-व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में प्रदेश की परिस्थितियां बेहद खराब थीं और उद्योग जगत का भरोसा कमजोर था। योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश की छवि बदली है और अब प्रदेश निवेश तथा औद्योगिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा का मतलब दंगा, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अराजकता है। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक मुकाबलों के बीच विपक्ष पर किए गए सीधे हमले के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार ने प्रदेश में निवेश के माहौल को बेहतर बनाने और उद्योगों को आकर्षित करने के लिए काम किया है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार लंबे समय से राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। एक ओर सरकार औद्योगिक विकास, निवेश प्रस्तावों और नए कारोबारी अवसरों को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश करती है, वहीं विपक्ष सरकार से निवेश प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन, रोजगार सृजन और युवाओं को मिलने वाले अवसरों पर जवाब मांगता रहा है।
योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुरानी सरकारों के कामकाज और वर्तमान सरकार की नीतियों की तुलना को केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी मुख्यमंत्री के इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बयानबाजी किस दिशा में आगे बढ़ती है।


