समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। जेल से बाहर आने के कुछ ही समय बाद प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक नए मामले में गिरफ्तार कर लिया। अब आजम खान ने अपनी इस गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, लेकिन तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया है कि इस मामले को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। ऐसे में अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि आखिर आजम खान की गिरफ्तारी के पीछे पूरा मामला क्या है और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी 1,170 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर ईडी ने कार्रवाई क्यों की है?
दरअसल, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को प्रवर्तन निदेशालय ने 31 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग के एक नए मामले में गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान कथित दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से बाहर आए थे। जेल से रिहाई के कुछ ही समय बाद ईडी की कार्रवाई ने पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। इसके बाद आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया। रविवार को अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब उन्हें इसी मामले में न्यायिक हिरासत में रहना होगा।
इस बीच सोमवार को आजम खान की ओर से उनके वकील निजाम पाशा ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग उठाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में दलीलें सुनीं। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकती है। यानी अब आजम खान की कानूनी लड़ाई देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में इस मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
अब इस पूरे मामले की सबसे बड़ी कड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़ी हुई है। ईडी ने 28 अक्टूबर को रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को धन शोधन निवारण कानून के तहत कुर्क करने की कार्रवाई की थी। एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये है। इस कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन जांच के दायरे में आ गए हैं। ईडी का आरोप है कि सरकारी विकास कार्यों के लिए आवंटित धनराशि का कथित तौर पर दुरुपयोग करके निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने इस मामले में आजम खान और उनके कथित सहयोगियों की भूमिका की जांच शुरू की है। हालांकि, ये एजेंसी के आरोप हैं और इनकी न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से आजम खान और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ दर्ज 58 प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी धन और संपत्तियों से जुड़े मामलों में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी सिलसिले में अगस्त महीने में भी जांच एजेंसी ने छापेमारी की थी और आजम खान से पूछताछ की थी। वहीं, आजम खान की ओर से उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए कानूनी प्रक्रिया और धन शोधन निवारण कानून के प्रावधानों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। अब इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या रुख सामने आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम जुलाई महीने में सामने आया था, जब रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय की ओर से अपील भी दाखिल की गई थी। इसके बाद ईडी की जांच और संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया। अब एक तरफ आजम खान 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं, तो दूसरी तरफ उनकी गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू हो चुकी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आजम खान को कोई राहत मिल पाएगी या उन्हें अभी न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा? क्या उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी करेगी? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस सप्ताह संभावित सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आजम खान के लिए यह कानूनी लड़ाई बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि जौहर ट्रस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में आगे की कार्रवाई उनके राजनीतिक और कानूनी भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।


