अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें स्वीकार कर ली हैं और दोनों देशों के बीच समझौता हो गया है। लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर ईरान पर अमेरिकी हमलों को रोक दिया गया है क्योंकि तेहरान ने अमेरिका की शर्तों को मान लिया है। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम और समृद्ध यूरेनियम से जुड़ी महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार कर ली हैं।
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हुआ है और न ही ईरान ने अमेरिका की किसी शर्त को स्वीकार किया है।
ईरान ने साफ कहा है कि किसी भी संभावित समझौते के लिए अमेरिका को पहले उसकी प्रमुख मांगों को मानना होगा। इनमें समृद्ध यूरेनियम पर नियंत्रण बनाए रखना, परमाणु कार्यक्रम पर किसी प्रकार की नई रियायत न देना और ईरान की रुकी हुई अरबों डॉलर की धनराशि जारी करना शामिल है।
इस बीच ट्रंप ने पहले ईरान को बड़े सैन्य हमलों की चेतावनी भी दी थी। उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान के अंदर सैन्य कार्रवाई कर सकता है और उसके रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। लेकिन कुछ घंटों बाद अमेरिकी प्रशासन ने हमले रोकने की घोषणा कर दी।
ईरान का कहना है कि अगर वह दबाव में झुकने वाला देश होता तो वह पहले ही अमेरिका के सामने झुक गया होता। ईरानी प्रवक्ताओं ने ट्रंप के बयानों को राजनीतिक प्रचार बताते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में कई बार ऐसे दावे किए गए, लेकिन कोई वास्तविक समझौता सामने नहीं आया।
उधर, इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी स्थानीय मीडिया को बताया कि उन्हें अमेरिका और ईरान के बीच किसी आधिकारिक समझौते की जानकारी नहीं है। इससे ट्रंप के दावों पर और सवाल खड़े हो गए हैं।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक तरफ अमेरिका समझौते का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान लगातार इन दावों को नकार रहा है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है या फिर एक बार फिर टकराव बढ़ता है।


