अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली महत्वपूर्ण तकनीकी वार्ता आखिरी समय में टल गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बहुप्रतीक्षित बैठक में शामिल होने के लिए रवाना होने वाले थे, लेकिन इजरायल के सैन्य अभियान ने पूरे घटनाक्रम को प्रभावित कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इजरायल, लेबनान और हिजबुल्लाह से संयम बरतने और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने से बचने की अपील की थी। हालांकि, इसके बावजूद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि इस हमले में कई लोगों की मौत हुई, जबकि जवाबी कार्रवाई में इजरायली सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद ईरान ने नाराजगी जताते हुए स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, जब तक लेबनान में युद्धविराम पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली तकनीकी बातचीत को स्थगित रखा जाएगा।
इस फैसले के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का प्रस्तावित स्विट्जरलैंड दौरा भी टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत की तैयारियां जारी हैं, लेकिन फिलहाल कार्यक्रम की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
दरअसल, एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाना था।
14 बिंदुओं वाले इस समझौता ज्ञापन के तहत दोनों देशों को तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत स्विट्जरलैंड में विशेषज्ञ स्तर की बैठक प्रस्तावित थी।
व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका इस समझौते को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होते ही तकनीकी वार्ता दोबारा शुरू कर दी जाएगी।
हालांकि, पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि किसी भी शांति प्रक्रिया को सफल बनाना आसान नहीं है। इजरायल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान, इजरायल और क्षेत्रीय देशों के बीच होने वाली बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यदि जल्द युद्धविराम लागू नहीं होता है तो शांति प्रक्रिया में और देरी हो सकती है।
फिलहाल, स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक नई तारीख का इंतजार कर रही है और दोनों पक्ष आगे की रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं।


