प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में वहां की राष्ट्रीय संसद को संबोधित कर एक नया कूटनीतिक इतिहास रच दिया। इसके साथ ही सेशेल्स की संसद उन विदेशी संसदों की सूची में शामिल हो गई, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित किया है। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताते हुए कहा कि वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्हें सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने का अवसर मिला है। उन्होंने भारत के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से सेशेल्स की जनता को शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भारत और सेशेल्स के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता केवल कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें सदियों पुरानी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1770 में जब सेंट ऐन द्वीप पर पहला जहाज पहुंचा था, तब उसमें पांच भारतीय भी शामिल थे। उसी समय से दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंधों की शुरुआत हुई, जो आज भी मजबूत बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता, बल्कि दोनों देशों को जोड़ने का काम करता है। प्रधानमंत्री के अनुसार दोनों देशों के संबंध सरकारों ने नहीं, बल्कि लोगों, परिवारों और पीढ़ियों ने मजबूत किए हैं। यही वजह है कि भारत और सेशेल्स के रिश्ते विश्वास, सम्मान और साझा मूल्यों पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग को भी दोनों देशों की साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने याद दिलाया कि जब सेशेल्स ने स्वतंत्रता हासिल की थी, तब भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS नीलगिरि पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद था। वहीं आज आजादी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर भारतीय नौसेना के आधुनिक युद्धपोत INS तरकश और INS इक्षक इस समारोह का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, क्षमता निर्माण और समुद्री निगरानी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘महासागर’ विजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, समृद्ध और सहयोगपूर्ण बनाना है। उनके अनुसार समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत और सेशेल्स की साझेदारी भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भाषण के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्य के सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि भारत और सेशेल्स मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत पर्यटन जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई संभावनाएं विकसित कर सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों से पर्यावरण संरक्षण और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और समृद्ध समुद्री विरासत मिल सके।
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को भारत और सेशेल्स के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा और हरित विकास के क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध आने वाले समय में और मजबूत हो सकते हैं।


