दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका द्वारा ब्राज़ील के उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद ब्राज़ील ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और जवाबी कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक व्यापार जगत में नई चिंता पैदा कर दी है।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की सरकार ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका का यह फैसला एकतरफा है और बहुपक्षीय व्यापार नियमों की भावना के खिलाफ है। राष्ट्रपति कार्यालय के सामाजिक संचार सचिवालय के अनुसार, ब्राज़ील अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा।
ब्राज़ील सरकार का कहना है कि अमेरिका ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 का हवाला देकर ब्राज़ीलियाई उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, लेकिन इस कदम का कोई ठोस औचित्य नहीं है। सरकार ने यह भी दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में अमेरिका ने ब्राज़ील के साथ वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में लगभग 424.5 अरब डॉलर का अधिशेष हासिल किया है। ऐसे में ब्राज़ील का कहना है कि व्यापार असंतुलन का तर्क उसके खिलाफ नहीं दिया जा सकता।
ब्राज़ील ने अपने बयान में यह भी कहा कि वर्ष 2025 के दौरान अमेरिका से आने वाले लगभग 76 प्रतिशत उत्पाद बिना किसी आयात शुल्क के देश में प्रवेश कर रहे थे। वहीं अमेरिकी वस्तुओं पर लागू औसत प्रभावी आयात शुल्क केवल 3.1 प्रतिशत था। सरकार का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि ब्राज़ील ने अमेरिकी व्यापार के प्रति उदार नीति अपनाई हुई थी।
ब्राज़ील का आरोप है कि अमेरिका द्वारा शुरू की गई जांच और उसके आधार पर लगाया गया टैरिफ विश्व व्यापार के स्थापित नियमों के अनुरूप नहीं है। सरकार ने कहा कि उसने पिछले एक वर्ष के दौरान यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी USTR के साथ लगातार बातचीत की और ऐसे कई दस्तावेज़ व सबूत प्रस्तुत किए, जिनसे यह साबित होता है कि ब्राज़ील अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल नहीं है।
हालांकि इन प्रयासों के बावजूद अमेरिका ने टैरिफ लागू करने का फैसला लिया, जिसके बाद ब्राज़ील ने भी जवाबी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान कर दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ब्राज़ील किन अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाएगा या अन्य कौन-से आर्थिक कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह व्यापारिक विवाद और गहराता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ब्राज़ील तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि, स्टील, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य कई क्षेत्रों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों और निवेश पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
ब्राज़ील ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि वह बातचीत के रास्ते को बंद नहीं करना चाहता और कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता है। लेकिन यदि उसके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
अब पूरी दुनिया की नज़र इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ब्राज़ील बातचीत के ज़रिए इस विवाद का समाधान निकाल पाएंगे या फिर यह व्यापारिक टकराव आने वाले दिनों में एक बड़ी वैश्विक ट्रेड वॉर का रूप ले लेगा।


