जंतर-मंतर से उठी छात्रों और युवाओं की आवाज धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंची। इसी क्रम में मुंबई भी इस आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। महाराष्ट्र में जैसे ही अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर आंदोलन का समर्थन किया, वैसे ही राज्य के कई शहरों में युवाओं ने अपनी भागीदारी दर्ज करानी शुरू कर दी। शुरुआती दिनों में यह आंदोलन पूरी तरह युवाओं के नेतृत्व में दिखाई दिया, जहां किसी राजनीतिक दल या संगठन की औपचारिक भूमिका नजर नहीं आई।
मुंबई के दादर और आजाद मैदान के आसपास पहले दो दिनों तक अलग-अलग इलाकों से आए युवा स्वतः एकत्रित होते रहे। किसी औपचारिक निमंत्रण के बिना छात्र और युवा पोस्टर लेकर पहुंचे, नारे लगाए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया। माहौल काफी हद तक जंतर-मंतर के प्रदर्शनों जैसा दिखाई दिया। धीरे-धीरे दादर इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया, जहां हर शाम बड़ी संख्या में युवा जुटने लगे।
इस आंदोलन की एक खास बात यह रही कि इसका स्वरूप पारंपरिक धरनों से अलग दिखाई दिया। प्रदर्शनकारी हर शाम तय समय पर पहुंचते, हाथों में पोस्टर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते और रचनात्मक तरीके से अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करते। कई युवाओं ने पोस्टर, कला और स्लोगन के माध्यम से अपनी बात रखी, जिससे यह आंदोलन सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
रिपोर्ट के अनुसार 20 तारीख को अभिजीत दिपके ने विभिन्न शहरों में युवाओं से प्रदर्शन करने की अपील की थी। इसके बाद मुंबई के चैत्यभूमि क्षेत्र में बड़ी संख्या में छात्र और युवा एकत्रित हुए। इसी दौरान पुलिस की कार्रवाई भी चर्चा का विषय बनी और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद पूरे घटनाक्रम पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा। वहीं इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और कानून-व्यवस्था के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई। पूरे घटनाक्रम पर संबंधित एजेंसियों की नजर बनी रही।
इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के कुछ नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। जानकारी के अनुसार दोनों दलों के प्रतिनिधि संबंधित पुलिस थानों तक पहुंचे और हिरासत में लिए गए युवाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। साथ ही प्रदर्शनकारियों के लिए कानूनी मदद से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई।
मुंबई में हुए इस आंदोलन ने यह दिखाया कि सोशल मीडिया और युवाओं की भागीदारी किसी भी मुद्दे को कम समय में बड़े स्तर पर चर्चा का विषय बना सकती है। बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी और उनकी सक्रिय भागीदारी ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में ला दिया। अब आने वाले समय में इस पूरे घटनाक्रम का सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर क्या असर पड़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।


