कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई बातचीत होती है, तो वह केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मुद्दे पर ही होगी। उनके अनुसार, PoK भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।
हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को पीछे हटाते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस दिन देशभर में शहीद सैनिकों के बलिदान को याद किया जाता है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
द्रास में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत और पाकिस्तान की विकास यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आधुनिक तकनीक और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि पाकिस्तान की प्राथमिकताएं अलग दिशा में दिखाई देती हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों की सोच और विकास मॉडल में स्पष्ट अंतर है।
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने हाल में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों और उसमें शामिल लोगों के खिलाफ भारत सख्त कार्रवाई करने की क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है। उन्होंने दोहराया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
रक्षा मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि सेना पहले भी पूरी तरह सक्षम थी और आज भी उतनी ही मजबूत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सेना के साथ मजबूती से खड़ी है और आवश्यक निर्णय लेने के लिए उसे पूरा समर्थन देती है। उनके अनुसार, देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि जब तक भारतीय सैनिक सीमाओं पर पूरी निष्ठा और साहस के साथ तैनात हैं, तब तक कोई भी दुश्मन भारत की ओर बुरी नजर डालने का साहस नहीं कर सकता। उन्होंने भारतीय जवानों के साहस, अनुशासन और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश उनके बलिदान का हमेशा ऋणी रहेगा।
अपने संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध के वीर अधिकारी कैप्टन विक्रम बत्रा को भी याद किया। उन्होंने उनके प्रसिद्ध नारे “ये दिल मांगे मोर” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय सेना भविष्य में भी हर चुनौती का डटकर सामना करेगी और देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।


