देश की राजधानी दिल्ली में अपराध का ग्राफ लगातार चिंता बढ़ा रहा है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू उस्मानपुर और दक्षिण दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके से सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ 17 वर्षीय नाबालिग की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई, वहीं दूसरी ओर 10वीं कक्षा के एक छात्र को मामूली विवाद के बाद गोली मार दी गई।
पहली घटना न्यू उस्मानपुर इलाके की है, जहां सोमवार रात करीब 10:30 बजे 17 वर्षीय अभिषेक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, अभिषेक को उसके दो जानकार घर से बाहर बुलाकर पास के एक नाले के किनारे ले गए। वहां पहले से मौजूद 5 से 7 युवकों के समूह ने उसे घेर लिया।
घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि कुछ देर बातचीत के बाद एक युवक ने अचानक चाकू निकालकर अभिषेक पर हमला कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए अभिषेक वहां से भागने की कोशिश करता है, लेकिन हमलावर उसका पीछा करते हैं और लगातार चाकू से वार करते रहते हैं। गंभीर रूप से घायल अभिषेक सड़क पर गिर पड़ा।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश को हत्या की वजह माना जा रहा है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
वहीं दूसरी घटना दक्षिण दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके की है। मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे एक फूड स्टॉल पर मामूली कहासुनी के बाद गोलीबारी हो गई। इस घटना में 10वीं कक्षा के एक छात्र को दो गोलियां लगीं, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित छात्र अपनी महिला सहपाठी के साथ खाना खा रहा था। इसी दौरान पास बैठे तीन युवकों के साथ उसकी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि एक आरोपी ने छात्र पर फायरिंग कर दी।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों में से एक भी 10वीं कक्षा का छात्र है और वह उसी स्कूल से जुड़ा हुआ है जहां पीड़ित पढ़ता था। पुलिस को शक है कि यह मामला किसी निजी या प्रेम संबंधी विवाद से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच जारी है।
राजधानी दिल्ली में किशोरों के बीच बढ़ती हिंसा और अपराध की ये घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी वारदातें यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर युवाओं में बढ़ती आक्रामकता और अपराध की मानसिकता को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।


