अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिकी मीडिया और डेमोक्रेटिक पार्टी पर तीखा हमला बोला है। ट्रम्प ने एक काल्पनिक उदाहरण देते हुए दावा किया कि यदि ईरान पूरी तरह से सैन्य आत्मसमर्पण भी कर दे, तब भी कुछ मीडिया संस्थान और उनके राजनीतिक विरोधी इसे अमेरिका की नहीं बल्कि ईरान की जीत के रूप में पेश करेंगे।
सोशल मीडिया पर किए गए अपने बयान में ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान की नौसेना पूरी तरह नष्ट हो जाए, उसकी वायु सेना समाप्त हो जाए, सेना हथियार डाल दे और नेतृत्व आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दे, तब भी कुछ समाचार संस्थान इसे ईरान की बड़ी सफलता बताने से नहीं चूकेंगे।
ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान के सैनिक सफेद झंडे के साथ बाहर निकलकर आत्मसमर्पण करें और तेहरान का नेतृत्व अमेरिका की शक्ति के सामने अपनी हार स्वीकार कर ले, तब भी आलोचक और मीडिया तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थान राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और वास्तविक घटनाओं को जनता तक निष्पक्ष रूप से नहीं पहुंचाते।
अपने बयान में ट्रम्प ने प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुछ बड़े समाचार संगठन ऐसी सुर्खियां चलाएंगे जिनमें यह दिखाया जाएगा कि ईरान ने अमेरिका पर शानदार और निर्णायक जीत हासिल की है, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होगी।
ट्रम्प ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके राजनीतिक विरोधी और कुछ मीडिया समूह पूरी तरह से भटक चुके हैं। उनके अनुसार, राजनीतिक ध्रुवीकरण के कारण कई बार तथ्यों की बजाय विचारधारा को प्राथमिकता दी जाती है।
हालांकि ट्रम्प ने मध्य पूर्व को लेकर उम्मीद भी जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। ट्रम्प के अनुसार, अगले सप्ताह तक युद्धविराम को आगे बढ़ाने और रणनीतिक समुद्री मार्गों पर सामान्य आवागमन बहाल करने के लिए किसी समझौते की संभावना है।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी अंतिम सहमति बननी बाकी है, इसलिए संबंधित समझौते को लेकर अंतिम मंजूरी फिलहाल रोकी गई है। ट्रम्प का मानना है कि यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिल सकती है।
ट्रम्प के इस बयान ने अमेरिका में मीडिया की निष्पक्षता, राजनीतिक ध्रुवीकरण और अंतरराष्ट्रीय मामलों की रिपोर्टिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल में इस तरह के बयान अमेरिकी राजनीति और मीडिया जगत के बीच तनाव को और बढ़ा सकते हैं।


