भारत और चीन के बीच जारी कूटनीतिक और सीमा संबंधी चुनौतियों के बीच बीजिंग से एक सकारात्मक संदेश सामने आया है। चीन में भारत के राजदूत Vikram Doraiswami ने कहा कि भारत और चीन के बीच दो हजार वर्षों से अधिक समय से ज्ञान, संस्कृति और विचारों का आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों की महत्वपूर्ण पहचान रहा है।
हाल ही में चीन में भारत के राजदूत के रूप में पदभार संभालने वाले दुरईस्वामी ने बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी (BFSU) में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों पर विस्तार से चर्चा की।
दो प्राचीन सभ्यताओं का साझा इतिहास
अपने संबोधन में दुरईस्वामी ने कहा कि भारत और चीन दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में शामिल हैं। सदियों से दोनों देशों के बीच शिक्षा, दर्शन, साहित्य, कला और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार संवाद होता रहा है।
उन्होंने कहा कि भाषाओं का पारस्परिक ज्ञानवर्धन और विचारों का आदान-प्रदान दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से दोनों देशों के संबंधों की एक विशेष पहचान रहा है।
मौर्य काल से आधुनिक युग तक का उदाहरण
राजदूत ने अपने व्याख्यान में मौर्य काल से लेकर आधुनिक दौर तक के कई ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और बौद्धिक संपर्क ने समाजों को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दुरईस्वामी के अनुसार, ज्ञान, दर्शन, कलात्मक परंपराओं, तकनीक और नवाचार के आदान-प्रदान ने भारत और चीन दोनों को लाभ पहुंचाया है।
BFSU में भारतीय भाषाओं की पढ़ाई
बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी चीन का प्रमुख विदेशी भाषा संस्थान माना जाता है। यहां हिंदी, संस्कृत, तमिल, बंगाली और उर्दू समेत 100 से अधिक भाषाएं पढ़ाई जाती हैं।
हाल ही में विश्वविद्यालय ने पंजाबी भाषा को भी अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। यहां बड़ी संख्या में चीनी छात्र, राजनयिक और सरकारी अधिकारी भारतीय भाषाओं का अध्ययन करते हैं।
संवाद और समझ बढ़ाने पर जोर
राजदूत दुरईस्वामी ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत और चीन के बीच संवाद से हमेशा पारस्परिक लाभ मिला है। उन्होंने शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संवाद संबंधों में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर सकते हैं।
भारत-चीन रिश्तों में नई उम्मीद
दुरईस्वामी का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और चीन सीमा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में 2000 साल पुराने ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद की संभावनाओं को रेखांकित करता है।


