इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इन दिनों अपने राजनीतिक करियर के सबसे बड़े कूटनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं। अमेरिका से लेकर खाड़ी देशों तक, कई पुराने सहयोगी अब इजराइल की आक्रामक नीतियों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई एक फोन बातचीत में तीखी बहस हुई। दावा किया जा रहा है कि ट्रंप ने नेतन्याहू को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उनकी नीतियां क्षेत्रीय शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचा रही हैं और अगर हालात नहीं बदले तो इजराइल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के साथ संभावित समझौते और मध्य पूर्व में स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में वॉशिंगटन नहीं चाहता कि किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव इस प्रक्रिया को प्रभावित करे।
उधर, इजराइल की ईरान नीति का असर उसके अरब सहयोगियों के साथ संबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। साल 2020 में अब्राहम अकॉर्ड के तहत संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई और बहरीन ने इजराइल के साथ संबंध सामान्य किए थे। लेकिन हालिया तनाव के बाद दोनों देशों का रुख पहले जैसा नहीं दिख रहा है।
हाल ही में इजराइली पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि नेतन्याहू ने यूएई का एक गुप्त दौरा किया और वहां के नेतृत्व से मुलाकात की। हालांकि यूएई के विदेश मंत्रालय ने इस दावे का सार्वजनिक रूप से खंडन कर दिया। यूएई ने कहा कि वह किसी भी प्रकार के गुप्त सैन्य या सुरक्षा समझौते का हिस्सा नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव और मुस्लिम देशों में जनमत को देखते हुए कई खाड़ी देश अब अधिक संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
बहरीन भी गाजा और लेबनान में जारी सैन्य अभियानों को लेकर अपनी चिंता जता चुका है। वर्ष 2023 में गाजा संघर्ष शुरू होने के बाद बहरीन ने अपना राजनयिक प्रतिनिधि वापस बुला लिया था, जो दोनों देशों के संबंधों में आई दूरी का संकेत माना गया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नेतन्याहू की सबसे बड़ी चुनौती अब केवल बाहरी नहीं बल्कि घरेलू भी है। एक तरफ उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से जारी संघर्ष का असर इजराइल की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
इजराइल के कुछ पूर्व सुरक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कई मोर्चों पर तनाव बनाए रखने की नीति देश के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकती है।
फिलहाल अमेरिका, खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती चिंताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजराइल अपनी रणनीति में बदलाव करेगा या फिर क्षेत्रीय राजनीति में और अधिक दबाव का सामना करेगा।
आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।


