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Afghanistan पर भारत का रुख साफ, MEA बोला- शांति, स्थिरता और विकास हमारी पहली प्राथमिकता

अफगानिस्तान को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखा है। विदेश मंत्रालय यानी MEA ने दोहराया है कि नई दिल्ली की प्राथमिकता अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देना है। भारत ने कहा है कि वह अफगान जनता के कल्याण के लिए मानवीय सहायता, विकास सहयोग और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के जरिए लगातार सहयोग करता रहेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने मंगलवार को कहा कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। उनका बयान उस समय आया जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान पर हुई बैठक में भारत की ओर से रखे गए विचारों को लेकर सवाल पूछा गया।

जायसवाल ने बताया कि न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की बैठक के दौरान भारत ने अपने पुराने और मजबूत संबंधों को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत और अफगानिस्तान केवल पड़ोसी देश ही नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि Parvathaneni Harish ने भी बैठक के दौरान अफगानिस्तान के लोगों के समर्थन में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार अफगान जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सहायता कार्यक्रम चला रहा है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, दवाइयों और मानवीय सहायता के क्षेत्र में अफगानिस्तान का सहयोग जारी रखे हुए है। इसके अलावा छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि अफगान युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें।

जायसवाल ने कहा कि भारत के विकास सहयोग कार्यक्रमों का लाभ अफगान समाज के सभी वर्गों तक पहुंचता है। इनमें महिलाएं, बच्चे और अन्य जरूरतमंद समुदाय भी शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के अधिकांश विकास कार्यक्रम किसी प्रकार के लैंगिक भेदभाव के बिना संचालित किए जाते हैं।

भारत का मानना है कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति और सुरक्षा पूरे क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है। इसलिए नई दिल्ली लगातार ऐसे प्रयासों का समर्थन कर रही है जो अफगानिस्तान को स्थिरता और आर्थिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करें।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की बैठक के दौरान शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। भारत ने अफगानिस्तान में सुरक्षा चुनौतियों और मानवीय परिस्थितियों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह अफगान जनता के साथ खड़ा रहेगा।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति में बड़े बदलाव आए हैं। ऐसे समय में भारत लगातार मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं के माध्यम से वहां के लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

भारत का यह ताजा बयान साफ संकेत देता है कि अफगानिस्तान को लेकर उसकी नीति में निरंतरता बनी हुई है। नई दिल्ली का फोकस किसी राजनीतिक विवाद से अधिक अफगान जनता के कल्याण, शांति और विकास पर केंद्रित है।

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