चेन्नई के लोक भवन में उस समय हलचल मच गई जब आतंकवादी हमले जैसी स्थिति का अभ्यास किया गया। हालांकि यह कोई वास्तविक हमला नहीं था, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी को परखने के लिए आयोजित की गई एक विशेष आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल थी।
इस हाई-इंटेंसिटी अभ्यास का नेतृत्व नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी के चेन्नई हब ने किया। मॉक ड्रिल में एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडोज़ के साथ तमिलनाडु कमांडो फोर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ और चेन्नई पुलिस ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।
अभ्यास के दौरान आतंकवादी हमले, बंधक बनाए जाने और आपातकालीन संकट जैसी परिस्थितियों का वास्तविक माहौल तैयार किया गया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बंधकों को सुरक्षित निकालने और आतंकियों को निष्क्रिय करने का प्रदर्शन किया।
ड्रिल के दौरान कमांडोज़ ने आधुनिक रणनीतियों, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी खतरे की स्थिति में सुरक्षा बलों की तैयारियों को और मजबूत बनाना था।
अधिकारियों के अनुसार, ऐसे संयुक्त अभ्यास सुरक्षा एजेंसियों को वास्तविक परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई करने में मदद करते हैं। साथ ही विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच तालमेल को भी बेहतर बनाते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश के महत्वपूर्ण सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर समय-समय पर इस तरह की मॉक ड्रिल आयोजित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
फिलहाल चेन्नई में आयोजित इस संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभ्यास को सफल माना जा रहा है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तत्परता की एक बार फिर झलक दिखाई है।


