अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े घटनाक्रम के बाद भारतीय शेयर बाजार और रुपये में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने और शांति समझौते की घोषणा के बाद निवेशकों में उत्साह बढ़ गया है, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर दिखाई दिया।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने शानदार तेजी दर्ज की। इसके साथ ही भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होता नजर आया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा की। इसके बाद दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला।
भारतीय मुद्रा बाजार में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। शुक्रवार को जहां रुपया 95 रुपये 18 पैसे प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, वहीं सोमवार को शुरुआती कारोबार में यह करीब 58 पैसे मजबूत होकर 94 रुपये 60 पैसे प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है, तो भारत के आयात बिल पर सकारात्मक असर पड़ता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की खबर ने भी बाजार में भरोसा बढ़ाया। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
एक और बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना रहा। डॉलर इंडेक्स में गिरावट आने से भारतीय रुपये को मजबूती मिली।
इन सभी सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
सोमवार सुबह शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा की तेजी के साथ 76 हजार 600 के स्तर के आसपास पहुंच गया।
वहीं निफ्टी में भी 300 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई और यह लगभग 23 हजार 950 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि निवेशकों को केवल शुरुआती तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश नहीं करना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच कथित शांति समझौते का पूरा आधिकारिक दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
इसलिए आने वाले दिनों में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर और आगे की बातचीत पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।
अगर यह समझौता सफल रहता है, तो इससे वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और भारतीय अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक फायदा मिल सकता है।
फिलहाल निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर आगे होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।


