फीफा विश्व कप में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए लागू किया गया हाइड्रेशन ब्रेक यानी पानी का ब्रेक अब बड़े विवाद का कारण बन गया है। कई पूर्व खिलाड़ियों और फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम खेल की लय को प्रभावित कर रहा है और छोटी टीमों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
हाल ही में जर्मनी और क्यूरासाओ के बीच खेले गए मुकाबले ने इस बहस को और तेज कर दिया है। विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने वाली सबसे कम आबादी वाले देशों में शामिल क्यूरासाओ ने जर्मनी जैसी चार बार की विश्व चैंपियन टीम को कड़ी चुनौती दी थी।
लिवानो कोमेनेन्सिया के गोल की बदौलत मुकाबला 1-1 की बराबरी पर पहुंच गया था और एक बड़े उलटफेर की संभावना दिखाई दे रही थी। लेकिन इसी दौरान हाइड्रेशन ब्रेक हुआ और मैच का पूरा रुख बदल गया।
ब्रेक के बाद क्यूरासाओ की टीम अपनी लय खो बैठी। मध्यांतर से पहले उसने दो गोल खा लिए और अंत में जर्मनी ने यह मुकाबला 7-1 से अपने नाम कर लिया।
इंग्लैंड के पूर्व स्ट्राइकर एलन शियरर ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें क्यूरासाओ के खिलाड़ियों के लिए बुरा लगा क्योंकि गोल करने के कुछ ही सेकंड बाद खेल रुक गया और उनकी लय पूरी तरह टूट गई।
दरअसल, फीफा ने अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की गर्मी को देखते हुए हर हाफ के दौरान हाइड्रेशन ब्रेक लागू किए हैं ताकि खिलाड़ी अत्यधिक तापमान से सुरक्षित रह सकें।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इसके अनचाहे परिणाम सामने आ रहे हैं। उनका मानना है कि इससे खेल का स्वाभाविक प्रवाह बाधित हो रहा है और बड़ी टीमों के कोचों को रणनीति बदलने का अतिरिक्त समय मिल रहा है।
आयरलैंड के पूर्व कप्तान रॉय कीन ने भी इस नियम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि फुटबॉल अपनी तेज रफ्तार और लगातार चलने वाले खेल के लिए पसंद किया जाता है, लेकिन यह ब्रेक उस लय को तोड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में यह व्यवस्था किसी टाइम आउट की तरह दिखाई देती है और कुछ लोगों का मानना है कि यह प्रसारण कंपनियों को अतिरिक्त विज्ञापन दिखाने का अवसर भी दे रही है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो शुरुआती 16 मुकाबलों में से 8 मैचों में हाइड्रेशन ब्रेक के 10 मिनट के भीतर गोल देखने को मिले हैं।
जर्मनी के अलावा ब्राजील के खिलाफ मोरक्को को भी इसका नुकसान उठाना पड़ा। मोरक्को ने शानदार शुरुआत की और पहले ब्रेक से पहले बढ़त भी हासिल कर ली थी, लेकिन खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही मिनटों में विनिसियस जूनियर ने गोल करके मुकाबला बराबर कर दिया।
इसके अलावा कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड, स्वीडन और ईरान जैसी टीमों को भी ब्रेक के तुरंत बाद गोल करने का फायदा मिला है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल की निष्पक्षता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले समय में फीफा को इस नियम की समीक्षा करनी पड़ सकती है ताकि खेल की गति और प्रतिस्पर्धा दोनों बरकरार रह सकें।


