पिछले कुछ वर्षों में ग्लूटेन-फ्री डाइट तेजी से लोकप्रिय हुई है। पहले इसे मुख्य रूप से ग्लूटेन सेंसिटिविटी और सीलिएक डिजीज से पीड़ित लोगों के लिए अपनाया जाता था, लेकिन अब वजन कम करने, बेहतर पाचन और हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए भी कई लोग इस डाइट को फॉलो कर रहे हैं। हालांकि, केवल गेहूं और उससे बने खाद्य पदार्थों को छोड़ देना ही पर्याप्त नहीं है। यदि ग्लूटेन-फ्री डाइट को सही तरीके से नहीं अपनाया जाए, तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी और पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लूटेन-फ्री डाइट अपनाने वाले लोगों की सबसे आम गलती यह होती है कि वे गेहूं हटाने के बाद केवल चावल, आलू या अन्य स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों पर निर्भर हो जाते हैं। इससे शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल पाता। इसलिए हर भोजन में प्रोटीन का संतुलित स्रोत शामिल करना बेहद जरूरी है। दाल, चना, राजमा, पनीर, दही, सोया या अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ न केवल लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं, बल्कि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा भी देते हैं।
यदि ग्लूटेन-फ्री डाइट के दौरान आपको बार-बार पेट फूलने, गैस बनने या भारीपन की समस्या होती है, तो एक फूड डायरी बनाना फायदेमंद हो सकता है। लगातार दो से तीन सप्ताह तक यह नोट करें कि कौन-सा भोजन खाने के बाद आपको परेशानी महसूस होती है। इससे उन खाद्य पदार्थों की पहचान करना आसान हो जाता है जो आपके शरीर के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
ग्लूटेन-फ्री डाइट अपनाने के बाद कुछ लोगों में कब्ज की समस्या भी देखने को मिलती है। इसका मुख्य कारण फाइबर की कमी हो सकती है। इसलिए दिन की शुरुआत फाइबर से भरपूर भोजन के साथ करें। ताजे फल, चिया सीड्स, अलसी के बीज, ओट्स (यदि प्रमाणित ग्लूटेन-फ्री हों) और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
यदि आप बाहर खाना खाते हैं, तो विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। कई रेस्टोरेंट्स की ग्रेवी, सॉस और प्रोसेस्ड मसालों में छिपा हुआ ग्लूटेन मौजूद हो सकता है। ऐसे में सादा दाल, चावल, ग्रिल्ड या तंदूरी व्यंजन जैसे विकल्प चुनना अधिक सुरक्षित माना जाता है। भोजन ऑर्डर करने से पहले यह जानकारी लेना भी अच्छा रहेगा कि उसमें गेहूं या ग्लूटेन युक्त सामग्री तो शामिल नहीं है।
इसके अलावा, पैकेज्ड फूड खरीदते समय हमेशा लेबल पढ़ने की आदत डालें। कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी होते हैं जिनमें ग्लूटेन छिपे रूप में मौजूद होता है। इसलिए “Gluten-Free” प्रमाणित उत्पादों को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प हो सकता है।
ध्यान रखें कि ग्लूटेन-फ्री डाइट हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होती। यदि आपको सीलिएक डिजीज, ग्लूटेन एलर्जी या डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई कोई विशेष समस्या नहीं है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के इस डाइट को अपनाने से बचना चाहिए।
संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और सही भोजन का चयन करके ही ग्लूटेन-फ्री डाइट का पूरा लाभ लिया जा सकता है। यदि इसे सही तरीके से अपनाया जाए, तो यह पाचन को बेहतर बनाने और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।


