उत्तर प्रदेश सरकार ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि राज्य अगले दो से तीन वर्षों के भीतर अपनी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 20,000 मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश लगभग 6,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन कर रहा है और सरकार का कहना है कि इस क्षमता में तेजी से विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा जेवर में एसएईएल इंडस्ट्रीज के सौर विनिर्माण संयंत्र की आधारशिला रखने के दौरान की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत राज्य के छह लाख से अधिक परिवार अपने घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन कर रहे हैं। इससे इन परिवारों के बिजली बिल में 50 से 60 प्रतिशत तक की कमी आई है और ऊर्जा की बचत भी हो रही है। उन्होंने कहा कि इन रूफटॉप सोलर सिस्टम के माध्यम से राज्य में 2,000 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिससे पारंपरिक तापीय बिजलीघरों पर निर्भरता कम हुई है।
मुख्यमंत्री ने वैश्विक ऊर्जा संकट का भी उल्लेख किया और कहा कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति भी अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरित ऊर्जा नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की जैव ईंधन नीति और एथनॉल उत्पादन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एथनॉल उत्पादक राज्य बन चुका है और देश के कुल एथनॉल उत्पादन में लगभग 55 प्रतिशत योगदान दे रहा है। इसके अलावा राज्य में सबसे अधिक कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र भी स्थापित किए गए हैं तथा अगले एक वर्ष के भीतर 100 नए बायोगैस प्लांट लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
जेवर में स्थापित होने वाले एसएईएल इंडस्ट्रीज के सौर विनिर्माण संयंत्र को उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और ऊर्जा विकास रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। लगभग 8,200 करोड़ रुपये के निवेश वाली इस परियोजना के तहत हर वर्ष 6 गीगावाट सौर सेल और 5 गीगावाट सौर मॉड्यूल के निर्माण की क्षमता विकसित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत में सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को सुरक्षित माहौल, बेहतर बुनियादी ढांचा और उद्योगों के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना है कि राज्य में हरित ऊर्जा, आधुनिक उद्योग और निवेश को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले निवेश और नई परियोजनाएं राज्य की ऊर्जा क्षमता के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी नई गति दे सकती हैं।


