आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, असंतुलित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले इसे बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवा और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि थायराइड की पहचान समय पर हो जाए और उचित इलाज शुरू कर दिया जाए, तो इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन लंबे समय तक इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल सकता है।
थायराइड गले के सामने स्थित एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो शरीर में जरूरी हार्मोन बनाती है। यही हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, वजन, ऊर्जा, हृदय गति, पाचन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन बनाती है तो उसे हाइपोथायराइडिज्म कहा जाता है, जबकि जरूरत से अधिक हार्मोन बनने की स्थिति को हाइपरथायराइडिज्म कहा जाता है। दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य कमजोरी या तनाव की तरह महसूस होते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। लगातार थकान महसूस होना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन का तेजी से बढ़ना या घटना, हाथों का कांपना, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, बालों का अत्यधिक झड़ना, गले में सूजन और दिल की धड़कन का तेज होना थायराइड के संभावित संकेत हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता और गर्भधारण में कठिनाई भी थायराइड से जुड़ी हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह समस्या पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि लंबे समय तक इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा, मानसिक तनाव और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए। थायराइड की दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना कभी बंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
थायराइड से बचाव और बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। आयोडीन युक्त नमक का सेवन करें, पौष्टिक और संतुलित आहार लें, नियमित रूप से योग और व्यायाम करें तथा तनाव को कम करने की कोशिश करें। पर्याप्त नींद लेना, रोजमर्रा की दिनचर्या को नियमित रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी बेहद जरूरी माना जाता है। यदि लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव या अन्य लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार शुरू किया जा सके।


