आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Anthropic के अत्याधुनिक AI मॉडल Mythos 5 को लेकर अपने पहले के प्रतिबंधों में आंशिक ढील दी है। नए आदेश के तहत अब कंपनी अपने इस शक्तिशाली AI मॉडल को सीमित दायरे में कुछ अधिकृत अमेरिकी संस्थाओं और सरकार द्वारा स्वीकृत संगठनों को उपलब्ध करा सकेगी। हालांकि इस फैसले से भारत समेत कई अन्य देशों की कंपनियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह छूट सभी कंपनियों के लिए नहीं होगी। केवल वे संस्थाएं और संगठन, जिन्हें सरकार की ओर से भरोसेमंद और अधिकृत माना गया है, वही इस उन्नत AI मॉडल का उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा अन्य देशों की कंपनियों और गैर-अधिकृत संगठनों के लिए Mythos 5 की पहुंच पहले की तरह सीमित रहेगी।
बताया जा रहा है कि अमेरिका ने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील तकनीकों के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए इस AI मॉडल पर कड़े निर्यात प्रतिबंध लगाए थे। सरकार का मानना था कि अत्यधिक सक्षम AI मॉडल यदि गलत हाथों में पहुंच जाते हैं तो उनका उपयोग साइबर हमलों, उन्नत निगरानी, सैन्य अनुसंधान और अन्य संवेदनशील गतिविधियों में किया जा सकता है। इसी वजह से इस तकनीक की उपलब्धता पर सख्त नियंत्रण रखा गया।
नए आदेश के बाद Anthropic को कुछ राहत जरूर मिली है, क्योंकि अब वह अपने AI मॉडल को पहले की तुलना में अधिक अमेरिकी ग्राहकों तक पहुंचा सकेगी। इससे कंपनी को व्यावसायिक विस्तार का अवसर मिलेगा और अमेरिका के भीतर अनुसंधान, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में AI तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि भारत की टेक कंपनियों और AI स्टार्टअप्स के लिए स्थिति अभी भी पहले जैसी बनी हुई है। मौजूदा नियमों के अनुसार भारतीय कंपनियां सीधे Mythos 5 मॉडल तक पहुंच नहीं बना सकेंगी। यही स्थिति कई अन्य देशों की कंपनियों पर भी लागू होगी, जिन्हें अमेरिकी सरकार की स्वीकृत सूची में शामिल नहीं किया गया है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में एडवांस AI तकनीकों को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे बड़े देश AI तकनीक को रणनीतिक संपत्ति मान रहे हैं। ऐसे में नई पीढ़ी के शक्तिशाली AI मॉडल पर निर्यात नियंत्रण और सुरक्षा नियम भविष्य में और सख्त हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का असर वैश्विक AI उद्योग पर भी पड़ सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अत्याधुनिक AI मॉडल का उपयोग रिसर्च, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ऑटोमेशन, हेल्थकेयर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में करना चाहती हैं। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उन्हें वैकल्पिक तकनीकों या स्थानीय AI मॉडलों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
भारत तेजी से AI सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। देश में कई स्टार्टअप और बड़ी टेक कंपनियां अपने खुद के जनरेटिव AI मॉडल विकसित करने में जुटी हैं। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों से भारतीय कंपनियों के लिए कुछ चुनौतियां जरूर बढ़ सकती हैं, लेकिन इससे घरेलू AI तकनीक के विकास को भी गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यदि अमेरिका अपनी नीति में और बदलाव करता है या अधिक देशों को भरोसेमंद साझेदारों की सूची में शामिल करता है, तो भारत जैसी तकनीकी क्षमता वाले देशों को भी भविष्य में इन उन्नत AI मॉडलों तक पहुंच मिल सकती है। फिलहाल अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और उसी आधार पर AI तकनीकों की उपलब्धता तय की जाएगी।


