खाना बनाते समय कभी-कभी मसालों का संतुलन बिगड़ जाता है और डिश जरूरत से ज्यादा तीखी या मसालेदार हो जाती है। ऐसे में कई लोग तुरंत पानी, चीनी या दही मिलाने लगते हैं, लेकिन हर मसाले का तीखापन अलग होता है और उसे संतुलित करने का तरीका भी अलग होता है। यदि सही उपाय अपनाया जाए तो बिना स्वाद बिगाड़े खाने को आसानी से संतुलित किया जा सकता है।
अगर खाने में लाल मिर्च ज्यादा हो गई है तो सबसे पहले उसमें फैट की मात्रा बढ़ाने की कोशिश करें। लाल मिर्च का तीखापन देने वाला तत्व कैप्साइसिन पानी में आसानी से नहीं घुलता, इसलिए केवल पानी डालने से फायदा नहीं होता। इसकी जगह ताजी मलाई, दही, मक्खन, घी या नारियल का दूध मिलाने से तीखापन काफी हद तक कम किया जा सकता है और स्वाद भी बरकरार रहता है।
यदि गरम मसाला जरूरत से ज्यादा पड़ गया है और उसकी वजह से सब्जी का स्वाद तेज हो गया है, तो उसमें चीनी डालने से बचना चाहिए। बेहतर तरीका यह है कि उसी सब्जी का बिना मसाले वाला थोड़ा अतिरिक्त बेस तैयार करके उसमें मिला दें। इससे मसालों का संतुलन अपने आप बेहतर हो जाता है और स्वाद भी प्राकृतिक बना रहता है।
अगर खाने में काली मिर्च ज्यादा हो गई है, तो उसका स्वाद संतुलित करने के लिए हल्का खट्टापन मिलाना बेहतर विकल्प माना जाता है। आप इसमें टमाटर की प्यूरी, थोड़ा दही या कुछ बूंदें नींबू का रस मिला सकते हैं। काली मिर्च के तीखेपन को कम करने के लिए चीनी डालने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे डिश का स्वाद असंतुलित हो सकता है।
सूखी सब्जियों में मसाला ज्यादा हो जाने पर उसे संतुलित करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन यह असंभव नहीं है। ऐसी स्थिति में उबले हुए आलू, उबली फूलगोभी, उबली मटर या पनीर मिलाकर सब्जी को कुछ मिनट धीमी आंच पर पकाएं। इससे अतिरिक्त मसाले का असर कम हो जाता है और सब्जी का स्वाद फिर से संतुलित हो जाता है।
खाना बनाते समय मसाले हमेशा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डालना और बीच-बीच में स्वाद चखना सबसे अच्छी आदत मानी जाती है। इससे मसालों का संतुलन बना रहता है और खाने का स्वाद भी बेहतरीन होता है। अगर कभी गलती से मसाला ज्यादा हो जाए, तो घबराने के बजाय सही किचन ट्रिक अपनाकर डिश को आसानी से बचाया जा सकता है।


