टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने विंबलडन में वापसी से पहले डोपिंगरोधी प्रणाली को लेकर बड़ा बयान दिया है। सात बार की विंबलडन चैंपियन सेरेना ने मौजूदा डोपिंग टेस्टिंग सिस्टम की आलोचना करते हुए इसे गैर पेशेवर और खिलाड़ियों के लिए अनावश्यक रूप से कठिन बताया। उनके बयान के बाद खेल जगत में डोपिंग नियमों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
44 वर्षीय सेरेना विलियम्स, जो दो बच्चों की मां हैं, ने कहा कि डोपिंग जांच की मौजूदा प्रक्रिया काफी थका देने वाली है। उन्होंने बताया कि नियमों में हुए बदलाव के कारण यदि कोई खिलाड़ी तय समय सीमा के भीतर सैंपल नहीं दे पाता, तो उसे अनुपस्थित माना जाता है। उनका कहना है कि एक मां होने के नाते बच्चों की जिम्मेदारियों और इस तरह के सख्त नियमों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता।
सेरेना ने कहा कि उन्हें इस व्यवस्था से नफरत है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि खेल को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए डोपिंग जांच जरूरी है, लेकिन खिलाड़ियों को कुछ व्यावहारिक छूट भी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी को किसी जरूरी कारण से तय समय के बाहर कहीं जाना पड़े, तो उसे नियम उल्लंघन नहीं माना जाना चाहिए।
सेरेना विलियम्स इस बार विंबलडन में लंबे समय बाद वापसी कर रही हैं। उन्होंने हाल ही में क्वींस क्लब टूर्नामेंट में युगल मुकाबले के जरिए कोर्ट पर वापसी की थी। अब वह विंबलडन महिला एकल के पहले दौर में माया जाइंट के खिलाफ मुकाबला खेलेंगी। उनके प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह एक बार फिर अपने शानदार खेल से सभी को प्रभावित करेंगी।
सेरेना का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय खेलों में डोपिंग नियमों और खिलाड़ियों की सुविधा के बीच संतुलन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कई पूर्व और मौजूदा खिलाड़ी भी समय-समय पर डोपिंग टेस्टिंग प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और खिलाड़ियों के अनुकूल बनाने की मांग उठा चुके हैं।


