महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर को महाराष्ट्र विधान परिषद का नया उपसभापति चुन लिया गया है। वह महायुति गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हुए।
सचिन अहीर ने मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट का दामन थामा था। पार्टी बदलने के तुरंत बाद उन्होंने विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया। बुधवार को विपक्षी महाविकास आघाड़ी द्वारा अपना उम्मीदवार वापस लेने के बाद उनका निर्विरोध निर्वाचन सुनिश्चित हो गया।
सचिन अहीर का उपसभापति चुना जाना महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। वहीं इसे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसद भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे। लगातार हो रहे इन राजनीतिक घटनाक्रमों ने उद्धव ठाकरे के संगठनात्मक आधार को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
सचिन अहीर लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और राज्य की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। अब महायुति सरकार ने उन्हें विधान परिषद के उपसभापति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र में दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरचना का दौर और तेज हो सकता है। ऐसे में सचिन अहीर का शिंदे गुट में शामिल होना और तुरंत बड़ी जिम्मेदारी मिलना राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।


