उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर से ‘स्कूल चलो’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में नई सड़कें, एक्सप्रेसवे और आधुनिक सुविधाएं तेजी से विकसित हो रही हैं, जिससे प्रदेश की तस्वीर बदल रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मथुरा और अलीगढ़ जैसे क्षेत्रों में दंगे और कर्फ्यू आम बात थे। उनके अनुसार उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी और कई इलाकों में पलायन की घटनाएं भी सामने आती थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उपद्रव और हिंसा के मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कानून का राज स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
अपने संबोधन में उन्होंने मुरादाबाद की एक पुरानी घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि पहले अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे मामलों में कठोर रुख अपनाया और दोषियों को कानून के दायरे में लाने का काम किया।
योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी धाम के विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहां आधुनिक कॉरिडोर का निर्माण तेजी से चल रहा है और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। उनके अनुसार वर्ष 2017 से पहले ऐसे विकास कार्य केवल कल्पना तक सीमित थे।
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें और शिक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही विकसित और आत्मनिर्भर प्रदेश की नींव रख सकता है।
‘स्कूल चलो’ अभियान का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ना, ड्रॉपआउट दर कम करना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना है। सरकार का कहना है कि इस अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा और शिक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाई जाएगी।


