Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

भारत का बड़ा कूटनीतिक दांव! दिसंबर में अमेरिका जा सकते हैं PM मोदी, चीन-पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल दिसंबर में अमेरिका दौरे की संभावना ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष के अंत में प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं, जबकि अगले वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत आने की भी चर्चा है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इन संभावित दौरों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं। यदि यह दौरा होता है, तो इसे केवल एक द्विपक्षीय बैठक नहीं बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।

पिछले कुछ महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर कई सवाल उठे थे। अमेरिकी टैरिफ नीति, पाकिस्तान को लेकर वॉशिंगटन के कुछ रुख और क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेदों ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी थीं। लेकिन अब दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सामने चीन सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बना हुआ है। ऐसे में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत उसकी सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में शामिल है। दूसरी ओर भारत भी क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री हितों और चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर लगातार सतर्क है। यही साझा रणनीतिक हित दोनों देशों को और करीब ला रहे हैं।

संभावित मोदी-ट्रंप मुलाकात में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिटिकल मिनरल्स, अत्याधुनिक तकनीक और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यदि इन क्षेत्रों में नए समझौते होते हैं तो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो सकती है।

इस संभावित सहयोग का सबसे अधिक असर चीन पर पड़ सकता है। यदि भारत और अमेरिका रक्षा तकनीक, AI, सेमीकंडक्टर और सुरक्षा सहयोग को नई गति देते हैं तो क्षेत्र में चीन के सामने एक और मजबूत रणनीतिक साझेदारी उभर सकती है।

पाकिस्तान भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। हाल के वर्षों में इस्लामाबाद ने अमेरिका के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिश की है। ऐसे में यदि वॉशिंगटन का रणनीतिक फोकस फिर भारत की ओर बढ़ता है तो पाकिस्तान की क्षेत्रीय अहमियत सीमित हो सकती है। हालांकि आतंकवाद और अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों के कारण अमेरिका के लिए पाकिस्तान का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।

बांग्लादेश भी इस बदलते समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है। हाल के महीनों में चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ते सहयोग पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। यदि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होती है तो ढाका पर भी अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है।

इस बीच भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर भी दुनिया की नजर टिकी हुई है। अमेरिकी राजदूत के अनुसार यह समझौता अंतिम चरण में है। इसके लागू होने पर व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, हाई-टेक उद्योग और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में बड़े अवसर खुल सकते हैं।

हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के संभावित अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन यदि ये दौरे होते हैं तो उनका असर केवल भारत और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे एशिया और वैश्विक रणनीतिक समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles