मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दावे किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो दिनों में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की। इनमें चाबहार बंदरगाह के आसपास का इलाका भी शामिल बताया गया है। स्थानीय मीडिया में पोर्ट क्षेत्र से धुआं उठने की खबरें सामने आईं। हालांकि, इन घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में नहीं हो सकी है।
ईरान में नुकसान के दावे
ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया हमलों में कई लोगों की मौत हुई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका ने कई सैन्य और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी कार्रवाई का उद्देश्य सैन्य क्षमताओं को सीमित करना था।
90 से अधिक ठिकानों पर कार्रवाई का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन स्टोरेज, तटीय निगरानी केंद्र और नौसैनिक सुविधाओं सहित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं, ईरानी मीडिया ने बुशहर परमाणु संयंत्र के आसपास धमाकों की भी जानकारी दी है। हालांकि, परमाणु संयंत्र को हुए नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान का पलटवार
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर ड्रोन भेजे गए। ईरानी सेना का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों और ईंधन भंडारण क्षेत्रों को निशाना बनाया गया।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित देशों या अमेरिकी प्रशासन की ओर से नहीं की गई है।
Hormuz Strait बना चिंता का केंद्र
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दुनिया की नजर फिर से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर टिक गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रही तो वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर असर डालने जैसे कदमों पर विचार कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बढ़ी कूटनीतिक चिंता
ईरान की संसद के वरिष्ठ नेताओं ने अमेरिका पर समझौते तोड़ने और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया है। वहीं, अमेरिकी नेतृत्व ने ईरान की नीतियों की आलोचना करते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू नहीं होती, तो यह तनाव पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
निष्कर्ष
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और सैन्य गतिविधियां तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में आधिकारिक बयानों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।


