Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

US Airstrikes on Iran: 7 घंटे तक बरसे हमले, ईरानी सैन्य ठिकाने बने निशाना, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की पुष्टि की है। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह अभियान कई घंटों तक चला और इसमें ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, सैन्य अभियान लगभग सात घंटे तक चला। इस दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमान, ड्रोन और नौसैनिक जहाजों ने सटीक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, तटीय रक्षा प्रणालियों तथा नौसैनिक क्षमताओं से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों को निशाना बनाने में किया जा सकता है।

अमेरिका का कहना है कि हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और सुरक्षा खतरों के बाद उसने ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज की है। इसी क्रम में अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री यातायात पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू की है। अमेरिका का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। ईरानी पक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि सैन्य दबाव और नाकेबंदी जारी रहती है, तो क्षेत्र से ऊर्जा और तेल निर्यात प्रभावित हो सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है।

फिलहाल ईरान की ओर से इन हमलों में हुए नुकसान का पूरा आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। वहीं दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की भी चर्चा हो रही है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच यह बढ़ता टकराव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश सैन्य कार्रवाई को और बढ़ाते हैं या फिर बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश करते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles