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Iran-US तनाव के बीच सऊदी पहुंचे NSA अजीत डोभाल! हुई हाई लेवल बैठक, क्या है भारत की रणनीति?

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सऊदी अरब का दौरा किया, जहां उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात को मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, रियाद में हुई इस बैठक में भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने बदलते क्षेत्रीय हालात, सुरक्षा सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और आपसी सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पिछले तीन महीनों के भीतर यह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की दूसरी सऊदी यात्रा है। इससे पहले अप्रैल में भी उन्होंने रियाद का दौरा कर सऊदी नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में लगातार दो उच्चस्तरीय यात्राएं इस बात का संकेत हैं कि भारत खाड़ी क्षेत्र के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

इसी वजह से भारत लगातार इस क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ संवाद बनाए हुए है। भारत की कोशिश है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे तथा ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो।

भारत और सऊदी अरब के संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। पहले जहां दोनों देशों के रिश्ते मुख्य रूप से तेल व्यापार तक सीमित थे, वहीं अब रक्षा, सुरक्षा, निवेश, तकनीक, व्यापार और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी लगातार बढ़ रही है।

दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला भी लगातार जारी है। इससे रणनीतिक विश्वास मजबूत हुआ है और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी काम आगे बढ़ा है।

भारत के लिए सऊदी अरब की अहमियत केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब में लगभग 27 लाख भारतीय रहते और काम करते हैं। भारतीय समुदाय वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और दोनों देशों के सामाजिक तथा आर्थिक संबंधों को भी मजबूत बनाता है।

इस बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी लगातार चिंता बनी हुई है। यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो उसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि भारत संतुलित कूटनीति अपनाते हुए सभी प्रमुख साझेदार देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है।

मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के वर्षों में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच भी रक्षा सहयोग बढ़ा है। इसके बावजूद भारत और सऊदी अरब के रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। दोनों देश साझा हितों वाले विषयों पर सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार संवाद बनाए हुए हैं।

फिलहाल, अजीत डोभाल की यह यात्रा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ऐसे समय में भारत की सक्रिय विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जब मध्य पूर्व का सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।

आने वाले समय में भारत, सऊदी अरब और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच होने वाली वार्ताओं पर दुनिया की नजर रहेगी। इन बैठकों के परिणाम न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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